प्रणव मुखर्जी की किताब आयी सामने, सोनिया गांधी के बारे में बोल दिया इतना कुछ

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भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अब इस दुनिया में नही है और उनका न होना भारतीय राजनीति के लिए भी के बहुत ही बड़ी और अपूरणीय क्षति है जिसे कभी भी भुलाया नही जा सकता है और उनकी एक खूबी है जो हर कोई मानता है और वो ये कि वो कभी काम या फिर राजनीति के लिए किसी की भी चाटुकारिता को उतारू नही हुए. अभी हाल ही में उनकी पत्नी ने ही उनका एक संस्मरण प्रकाशित किया है जो अगर वो जीवित होते तो वो खुद ही करते लेकिन उनके जाने के बाद में भी उनके शब्द बोल रहे है.

मेरे राष्ट्रपति बनते ही राजनीति से हट गया कांग्रेस का फोकस, सोनिया गांधी सक्षम नही थी
अपने संस्मरण में प्रणव मुखर्जी ने काफी गूढ़ और राजनीतिक रूप से गहरी बाते लिखी है. वो लिखते है ‘कांग्रेस के कई नेता ऐसा मानते है कि अगर 2004 में मैं डॉक्टर मनमोहन सिंह की जगह पर प्रधानमंत्री बनता तो शायद जो भी हुआ उसे टाला जा सकता था हालाँकि मैं इस बात से सहमत नही हूँ. मैं तो ये मानता हूँ कि जब मैं राष्ट्रपति बना था उसके बाद से कांग्रेस का ध्यान राजनीति पर से ही भटक गया था.’

पूर्व महामहिम आगे लिखते है ‘सोनिया गांधी इतनी सक्षम नही थी कि वो पार्टी के मामलो को हेंडल कर सके और डॉक्टर सिंह लम्बे लम्बे वक्त तक सदन से गायब रहते थे. वो व्यक्तिगत रूप से सांसदों के सम्पर्क में रहां करते थे. 2 जून 2012 को सोनिया गांधी ने मुझे बुलाया और कहा कि आपको राष्ट्रपति बनाया जा रहा है लेकिन आपके योगदान को कभी भुलाया नही जाएगा. बीच में मुझसे उन्होंने राष्ट्रपति के नाम के लिए सलाह भी मांगी थी. मुझे लगा अगर मैं डॉक्टर सिंह का नाम सुझाव में आता है तो शायद वो मुझे प्रधानमंत्री बना दे, ये अफवाहे हमने खूब सुनी थी.’

उन्होंने बस इन चीजो के इर्द गिर्द बाते कही है और नरेंद्र मोदी के लिए वो लिखते हुए कहते है कि उनका काम करने का रवैया काफी अधिक तानाशाही से भरा हुआ है. तमाम बाते है जो प्रणव मुखर्जी के शब्दों में मिलती है.