अपनी ही बात से पलट गये शरद पवार, अब कोई कैसे करेगा भरोसा

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शरद पवार अपने आप में एक बहुत ही बड़ी राजनीतिक शख्सियत रह चुके है जिनका राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति में भी काफी गजब का प्रभाव रहा है. मगर अब जब इंसान राजनीति में इतना गहरा डूब जाता है तो फिर उसमें सच और झूठ के फासले काफी दूर हो जाते है और ये अपने आप में फिर उनके ही व्यक्तित्व में आपसी विरोध दर्शाते हुए नजर आता है और ऐसा ही कुछ इन दिनों में शरद पवार के साथ में भी होते हुए नजर आ रहा है.

सरकार में थे तब करते थे कृषि में निजी क्षेत्र की वकालत, अब नही है तो करने लगे विरोध
कभी शरद पवार कृषि मंत्री हुआ करते थे और उन दिनों में वो खुद बतौर कृषि मंत्री कृषि के क्षेत्र में निजी प्लेयर्स को लाये जाने की वकालत करते थे. उन्होंने बाकायदा ऐसा करने के लिए देश के कई राज्यों के मुख्य मंत्री जिनमे तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी शामिल थी सभी को पत्र लिखा था और कृषि में निजीकरण को काफी लाभप्रद बताने की कोशिश की थी, वो इस बिल में उस वक्त में काफी पक्ष में भी नजर आते थे.

मगर अब जब वो सरकार में नही है और केंद्र में विपक्ष में जा चुके है तो वो इसके खिलाफ बोल रहे है उन्होंने इसे किसान के हितो के खिलाफ बताया है और तो और वो सरकार को किसानो की बात मान लेने और उनके सामने झुक जाने की सलाह भी दे रहे है तो ऐसे में लोगो ने सोशल मीडिया पर बवाल करना शुरू कर दिया कि एक व्यक्ति दो समय में दो अलग अलग पक्ष कैसे ले सकता है?

हालांकि इस पर एनसीपी ने अपनी तरफ से सफाई भी पेश करने की कोशिश की है लेकिन इससे जो हो चुका है और जो हो चुका है और जो लोगो को नजर भी आ रहा है वो तो बदलने से रहा और इतना तो लगभग तय आप भी मान ही सकते है.