सामने आया शिवसेना का बीजेपी से अलग होने का दुःख, कही आखिरकार ऐसी बात

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शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी आज अलग हो चुकी है और शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार में है उनके पास में नए दोस्त है और उनके साथ मिलकर के वो आगे की राजनीतिक भूमिकाएं तय करते है लेकिन साथ ही साथ ही साथ में उनकी कुछ एक बाते है जो ये भी बता देती है कि चाहे शिवसेना ने आज भाजपा से रास्ते अलग कर लिए है लेकिन इसके बाद भी आज भी उसके अन्दर वो टीस है वो तकलीफ है जो ये बताती है कि आज भी वो उस तरफ चले जाने को एक तरह से आतुर है.

महाराष्ट्र में बीजेपी की ज्यादा सीट आने की वजह से शिवसेना को सीएम पद नही दिया लेकिन बिहार में तीसरे नम्बर की जेडीयू को दे दिया
शिवसेना ने अभी हाल ही में बिहार में जो भी घटनाक्रम हुआ है उस पर अपनी तरफ से प्रतिक्रिया दी है और सामना मुखपत्र के माध्यम से दी है जिसमे वो लिखते है कि महाराष्ट्र में भाजपा को ज्यादा सीटे मिली इसलिए शिवसेना को मुख्यमंत्री पद नही दिया लेकिन बिहार में फिसलकर के तीसरे नम्बर पर जा चुकी जदयू को मुख्यमंत्री पद का मुकुट पहना दिया.

राजनीति के इस त्याग का वर्णन करने के लिए तो स्याही कम पड़ जायेगी. आखिर नीतीश कुमार इस तरह से बीजेपी की इतनी ज्यादा मेहर बानी का बोझ कब तक उठा सकेंगे? शिवसेना भी यही चाहती थी कि जैसे बिहार में नीतीश को बीजेपी ने अपने सपोर्ट से सीएम बनाया है वैसे ही महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को बना दिया जाए और वो बीजेपी ने इससे इनकार कर दिया था और फिर जो तल्खियाँ बढ़ी वो तो आपके बिलकुल सामने ही है कि हालात अंत में क्या बने है.

खैर जो भी है अभी की स्थिति को देखकर के इतना साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि शिवसेना चाहे सत्ता के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ में गठबंधन करके चल रही है लेकिन मन से उनकी दोस्त अब तक नही हो पायी है.