बीजेपी के आगे झुक गयी शिवसेना, लिया ये बड़ा फैसला

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आज शिवसेना सत्ता में है और कांग्रेस व एनसीपी की मदद से है इस बात को कोई नकार नही सकता है लेकिन साथ ही साथ में अभी शिवसेना पर प्रेशर इतना ज्यादा है जिसकी कोई हद नही है क्योंकि एक तरफ कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर के शिवसेना पर अपना साथ देने और अपने हिसाब से काम करने का दबाव देती है वही कुछ काम जो शिवसेना करना नही चाहती है वो भी उन्हें करना पड़ता है क्योंकि सत्ता में बैठी बीजेपी सरकार और महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी बीजेपी वाकई में ऐसा ही कुछ करने पर दबाव बनाती रहती है.

महाराष्ट्र में काम आया बीजेपी का  दबाव, 16 नवम्बर से खुले सारे मंदिर
जब से करोना की स्थिति हुई थी तब से महाराष्ट्र में कई चीजे बंद थी लेकिन धीरे धीरे मार्किट से लेकर ठेके तक खोल दिए थे गये और लोग वहाँ पर आना जाना कर रहे थे मगर जब बात धार्मिक स्थलों पर आती तो यहाँ पर महाराष्ट्र की सरकार कोई भी छूट देने को राजी नही थी. इस पर बीजेपी ने लगातार शिवसेना सरकार पर दबाव बने, अर्नब गोस्वामी के चैनल पर कई बार इसे लेकर डिबेट भी हुई.

यही नही राज्यपाल ने बाकायदा पत्र लिखकर के महाराष्ट्र सरकार पर मंदिरो को कुछ हद तक खोलने का दबाव बनाया जो आखिरकार काम करते हुए नजर आ रहा है और अब इस 16 नवंबर में महाराष्ट्र में मंदिर खोलने की इजाजत दे दी गयी है. संजय राउत ने तो इस के बाद ये तक कह दिया है कि मंदिरों को फिर से खोले जाने का क्रेडिट बीजेपी को नही लेना चाहिए.

यानी कही न कही शिवसेना को इस बात की चिंता लगी रहती है कि किसी चीज का क्रेडिट अगर बीजेपी ले जाती है तो फिर इसका सीधा सीधा नुकसान उनको ही होने जा रहा है और वो ऐसा होने देने से रोकने की कोशिश भी करते है लेकिन क्योंकि बीजेपी भी कोई कम पॉवरफुल नही है तो चीजे अलग तरीके से काम करती है.