शिवसेना को देखनी पड़ी भारी बेज्जती, जनता ने सिरे से नकारा

364

शिवसेना महाराष्ट्र में नम्बर वन पार्टी बनने की कोशिश करने के लिए अक्सर ही जूझते हुए नजर आ जाती है लेकिन बीजेपी ने वहाँ पर कब्जा कर रखा है और अब शिवसेना जब चाहती है कि वो और राज्यों में भी अपना विस्तार करे तो ऐसे समय में जनता शिवसेना और उद्धव ठाकरे के प्रतिनिधित्व को बहुत ही बुरे तरीके से खारिच कर दे रही है जो अपने आप में उद्धव ठाकरे के लिए विस्तार के मामले में चिंता का विषय हो सकता है. अब बात ही कुछ ऐसी है कि लोग सवाल करने लगे है.

बिहार चुनाव में शिवसेना ने उतारे थे अपने 22 उम्मीदवार, नोटा से भी कम वोट मिले
महाराष्ट्र से बाहर अपना दम दिखाने के लिए शिवसेना ने इस बार बिहार के चुनावों में भी 22 सीटो पर अपने अपने उम्मीदवार उतारे थे और इन उम्मीदवारो ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर इलेक्शन लडा था लेकिन हालत ऐसी हो गयी कि शिवसेना को नोटा से भी कम वोट मिले है. बिहार चुनाव में नोटा को मिले वोटो का प्रतिशत 1.68 रहा जबकि शिवसेना को महज 0.44 प्रतिशत वोट ही  मिले जो अपने आप में काफी अधिक बुरा प्रदर्शन रहा है.

जब शिवसेना नीतीश कुमार के कम हो रहे कद पर तंज कस रही थी तो उस पर संजय निरूपम ने जवाब देते हुए ये कह दिया कि बिहार में शिवसेना 22 सीटो पर चुनाव लडी और सुनने पता पता चला कि उसे 21 सीटो पर नोटा से भी कम वोट मिले है, ऐसे में उसे कांग्रेस को सलाह देने की बजाय चुप ही रहना चाहिए. कुछ इस तरह से अब शिवसेना को जवाब मिल रहे है और ऐसे में उद्धव ठाकरे को दुबारा से अपने नीतियों के ऊपर विचार करने की जरूरत महसूस करनी चाहिए.

हालांकि ऐसा नही है कि सब पार्टियाँ जो बिहार में एंट्री ले रही है वो शिवसेना की तरह फेल ही हुई है. एएमआईएम हो या फिर वीआईपी हो इन छोटी छोटी पार्टियों का प्रदर्शन बिहार में काफी बेहतरीन रहा है और जनता इनके साथ गयी है.