सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को जमानत तो दे दी, मगर साथ में ये शर्त भी रखी है

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अभी आपको मालूम होगा कि सात दिन तक सलाखों के पीछे रहने के बाद में फ़िलहाल पत्रकारिता जगत के नये हीरो बन चुके अर्नब गोस्वामी आखिरकार बाहर आ गये है. उनको सेशन कोर्ट और हाई कोर्ट से चाहे कोई राहत नही मिली लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके मूलभूत अधिकारों पर चिंता जाहिर करते हुए आखिरकार उनको जमानत दे दी है और कही न कही इसे बहुत ही बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, मगर कुछ बाते है जो ध्यान रखने की जरूरत है और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भी गौर करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने दी है निजी मुचलके पर जमानत, 50 हजार होंगे डिपोजिट
भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को यहाँ पर केवल जमानत दी है केस से पूरा मुक्त नही किया है ये बात ध्यान रखने की जरूरत है. अभी अर्नब गोस्वामी को 50 हजार रूपये निजी मुचलके पर जमा करवाने पर जमानत दे दी गयी है, यानी अब वो जेल से तो बाहर है लेकिन जब पुलिस इस के में जब उनसे पूछताछ करना चाहेगी तो कानूनी प्रक्रिया का पालन करके उनको पूछताछ के लिए फिर से स्टेशन बुला सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ पर इस केस में पाया है कि अर्नब का जो अरेस्ट था वो गैर कानूनी था, उनके मूल अधिकारों और पर्सनल लिबर्टी का हनन हुआ है और साथ ही साथ में सत्ता का दुरुपयोग होने जैसा आरोप तो लगा ही है. इसके अलावा हाई कोर्ट ने अपने कार्य का पालन नही किया ऐसा भी पाया गया. इन सब चीजो को मद्देनजर रखते हुए अरनब को बेल दी गयी है, हालांकि केस अभी भी चलेगा जो भी उन पर चल रहा था लेकिन उनको अब पहले की तरह उठाया नही जा सकेगा और न ही परेशान किया जा सकेगा.

अर्नब गोस्वामी का मामला अभी के हिसाब से देखे तो भारत की न्याय व्यवस्था में एक बेंचमार्क के रूप में स्थापित हुआ है जहाँ पर लोगो की पर्सनल लिबर्टी, फ्रीडम ऑफ स्पीच और मूलभूत अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट के शब्द अपने आप में काफी अधिक आगे चलकर अन्य केसों में भी मददगार साबित होंगे.