शिवसेना और कांग्रेस की दोस्ती में पड़ी फूट, मुश्किल में उद्धव ठाकरे

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अभी महाराष्ट्र में तीन पार्टियाँ मिलकर के सरकार चला रही है. एक शिवसेना, दूसरी एनसीपी और तीसरी कांग्रेस और अगर एक भी अपना हाथ खींच लेती है तो ये सरकार धडाम हो जायेगी इस बात में कोई भी शक नही है और लग रहा है कि इस बात ऐसा ही कुछ होने भी जा रहा है जो कही न कही इनके लिए एक बड़ी मुसीबत लेकर के आ सकता है. दरअसल कांग्रेस को महराष्ट्र में रिप्रेजेंट करने वाले अशोक चव्हाण ने हाल ही में बयान ही कुछ ऐसा दिया है जो सवाल खड़े कर रहा है.

चव्हाण ने लगाया ठाकरे पर भेदभाव करने का आरोप, कांग्रेस शासित जगहों पर फंड नही देते
इससे पहले कई बार छोटे मोटे कांग्रेस नेता शिवसेना पर फैसले में न सुनने के आरोप लगाते रहे है लेकिन इस बार कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अशोक चव्हाण ने बयान दिया है जो काफी मायने रखता है. उन्होंने एक सभा में खुले तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कांग्रेस शासित निगमों को फंड ही नही देते है. हम खुद अपने प्रयास से धन मुहैया करवा रहे है.

अशोक ने साफ़ तौर पर ठाकरे के बारे मे बोला है कि वो कांग्रेस को अन्दर ही अन्दर फंड न पहुंचाकर उनकी प्रशासनिक ताकतों को कमजोर कर रहे है जिसके चलते कांग्रेस कमजोर होकर फिर से सत्ता में ही न आ पाए. ऐसे में अगर ये बाते दिल्ली तक पहुँचती है और कांग्रेस हाई कमान इस पर विचार करता है तो जाहिर तौर पर एक बात साफ़ है कि वो शिवसेना के साथ में गठबंधन बनाये रखने के ऊपर सोचेंगे क्योंकि पार्टियाँ हमेशा सत्ता से ज्यादा लम्बे समय तक अपने लोगो को बेहतर बनाये रखने के लिये कोई भी डील करती है.

तो अब जो कांग्रेस और शिवसेना के बीच में ये जो सम्बन्ध बिगड़ रहे है उसके बाद में क्या उद्धव ठाकरे की सरकार बची रहती है या फिर गिर जाती है ये तो आने वाला वक्त ही बता सकता है क्योंकि राजनीति में उतार चढ़ाव चलते ही रहते है.