इधर अमित शाह ने महबूबा मुफ़्ती को किया आजाद, उधर महबूबा ने बाहर निकलते ही दिया ऐसा बयान

522

अभी हाल ही में कश्मीर को लेकर के काफी बड़ी खबर आयी है और इसे एक तरह से एक राजनीतिक डेवलपमेंट के तौर पर भी देख सकते है जिसमे पता चलता है कि महबूबा मुफ़्ती जो कि एक जानी मानी नेता है वो एक साल के भी लम्बे समय के इन्तजार के बाद में फ्री कर दी गयी है. यानी अब उनको नजरबंद नही रखा जाएगा. सरकार ने ये किया तो ऐसा सोचकर के ही था कि अब वो थोडा शांत रहेगी लेकिन बहार आकर फिर से वही बोलना शुरू कर दिया है.

उस काले दिन का फैसला आज भी खटकता है, जारी रहेगा संघर्ष
करीब 14 महीने की रिहाई के बाद में महबूबा मुफ़्ती ने अपने बयान में कहा कि उस काले दिन का फैसला आज भी मेरे दिमाग में खटकता रहता है और इसके लिए आगे भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा. वो कहती है कि हम एक बार फिर से अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए संघर्ष करेंगे. मैं 14 महीने बाद में रिहा हुई हूँ और अन्दर भी पल पल वो बात मेरे दिलो दिमाग में थी मुझे मालूम है यही कैफियत जम्मू कश्मीर के लोगो के साथ में भी रही होगी.

हम में से कोई भी उस बेज्जती भरे हुए दिन को भूल नही सकता है. दिल्ली के दरबार ने गैर लोकतांत्रिक तरीके से जो हमसे छीन लिया है वो हमें वापिस लेना ही होगा. मैं जानती हूँ कि ये रास्ता आसान नही है लेकिन करना होगा. जो भी जम्मू कश्मीर के लोग अन्दर बंद है उनको भी रिहा किया जाए. महबूबा को इतने वक्त तक बंद रखने के बाद भी वो फिर से वैसी ही भाषा का प्रयोग कर रही है जैसा पहले कर रही थी.

बात यही पर ही नही रूकती है. इससे महज कुछ वक्त पहले फारूख अब्दुल्ला ने भी गलत बयान देते हुए कहा था कि वो चीन की मदद से फिर से कश्मीर में धारा 370 लगवा देंगे. इस तरह की चीजो से भारत और भारत सरकार का इन नेताओं पर से भरोसा और कमजोर होता चला जाता है.