सुब्रमण्यम स्वामी इस वजह से अपनी ही मोदी सरकार की जमकर आलोचना कर रहे है

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बीजेपी के अन्दर आंतरिक लोकतंत्र है जिसके चलते हुए नेताओं को आजादी दी जाती है कि वो अपने हाई कमान के खिलाफ सवाल कर सके और आवाज बुलंद कर सके ताकि गलत फैसलों को बदला जा सके और सही मायनों में इसका उपयोग सुब्रमण्यम स्वामी करते हुए कई बार नजर आ जाते है. इस बार स्वामी जी एक नही बल्कि दो दो वजहो से मोदी सरकार की आलोचना कर रहे है और दोनों ही फैसले उनको पसंद नही आ रहे है जिसके बारे में उन्होंने काफी अधिक खुलकर के बोला भी है. आप जरा इस बात को ध्यान से समझ भी सकते है.

ऐसी हालतों में जेईई और नीट के एग्जाम करवाना जलियाँ वाला बाग़ जैसा, चीन रक्षा मंत्री से मुलाक़ात भी है भूल
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पहले भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर के मांग की थी कि वो ये परीक्षा कैंसिल करवा दे और जब नही हुआ तो उन्होंने एक बार फिर से ट्वीट करके कहा है कि जेईई और नीट परीक्षा इस चल रहे करोना, लॉकडाउन, ढहती हुई इकॉनमी, खिलते मानसून और चीन की हरकतो के बीच में एक जलियावाला बाग़ की तरह है, जहाँ मासूमो के साथ ये सब हो रहा है.

इसके अलावा स्वामी जी चीन से बातचीत को लेकर के भी खुश नही है. वो कहते है कि चीन के लिए आप कठोर बनना सीखिए. वो तो भारत को लेकर के कबका ही फैसला कर चुका है. कितना ही हो पर उसके साथ में टेबल पर बैठने की मत सोचिये. ये बात वो राजनाथ सिंह की मीटिंग को देखने के बाद में बोलते हुए नजर आये. इसके अलावा उन्होंने तो ये तक कह दिया कि चीन के साथ 18 बार बैठने के बाद भी वो भारतीय नेताओं की कोई कद्र नही करता है.

यानी स्वामी जी का गुस्सा तो है और वो चाहते है कि मोदी सरकार इन चीजो को उनके सलाह के अनुसार करे ताकि स्थितियां सुधरे. खैर अभी पीएम और केबिनेट उनकी बात को कितना सुनती है ये तो आने वाला वक्त ही बता पायेगा.