सचिन पायलट कांग्रेस में वापिस तो आ गये, लेकिन आते ही उनकी हो गयी बड़ी बेज्जती

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एक लम्बी उठापटक और काफी ज्यादा माथापच्ची के बाद में सचिन पायलट वापिस कांग्रेस के मुख्य खेमे में लौट तो आये है लेकिन वापिस आने के बाद में अब उनके हालात पहले जैसे नही रह गये है. आप ये भी कह सकते है कि पायलट गये तो थे अपनी साख को और ज्यादा बड़ा करने और राजनीतिक कद को बड़ा करने लेकिन जब वो वापिस लौटे है तो उनको पहले की तुलना में काफी छोटी जगह मिल रही है जो कही न कही उनके कद को अपने आप से ही छोटा कर दे रही है.

आगे की लाइन में मुख्यमंत्री के पास नही बैठेंगे अब पायलट, सीट नम्बर 127 पर जाना होगा
अब सचिन पायलट के पास में न तो उपमुख्यमंत्री का पद बचा है और न ही वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष है और इस कारण से उनसे विधानसबभा जो बहुत ही ऊँची सीट हुआ करती थी वो भी ले ली गयी है. सचिन पायलट को अब सबसे आगे मुख्यमंत्री के पास में नही बिठाया जायेगा बल्कि वो काफी पीछे की तरफ बैठेंगे. जी हाँ सचिन पायलट की सीट अब 127 है जो कि निर्दलीय विधायको के पास में है.

गहलोत ने सचिन पायलट को माफ़ करते हुए कहा कि जो हुआ उसे भुला दो, आखिर अपने तो अपने होते है. इसके बाद में अशोक गहलोत ने पायलट की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हम चाहते तो बिना 19 विधायको के भी बहुमत साबित कर देते लेकिन उसमे ख़ुशी नही मिलती. गहलोत ने तो ये तक कहा कि हम खुद विश्वास प्रस्ताव लायेंगे. ऐसा गहलोत इसलिए कर रहे है ताकि उन पर आगे चलकर के कोई  भी सवाल खड़े न कर सके.

अब कही न कही ये जो भी बाते हुई है उसके बाद में इतना तो साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि चीजे कोई ख़ास अच्छी स्थिति में पायलट के लिए तो नही है क्योंकि वो विधानसभा में अपनी कुर्सी ही खो चुके है और अपनी ही पार्टी में रहते हुए ऐसा होना किसी बेज्जती से कम तो नही है.