अमित शाह ने वो कर दिया जो डोनाल्ड ट्रम्प जैसे सर्वशक्तिशाली नेता तक न कर सके

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आज सारे विश्व भर के लीडर्स की परीक्षा चल रही है क्योंकि जिन मुसीबतों से बचाने के लिए इनको चुना जाता है क्या वो उनमे वाकई में सफल हो पा रहे है? अगर आज की डेट में देखे तो अधिकतर लोग इसमें फेल ही हो रहे है क्योंकि अगर हम करोना के मद्देनजर चीजो को देखे तो हालात दिन ब दिन सुधरने की बजाय बिगड़े ही है चाहे वो रूस हो, अमेरिका हो या फिर कोई और जगह ही क्यों न हो? भारत में भी हालात बिगड़े ही है लेकिन कोई एक जगह है जहाँ इन दिनों सुकून पसर रहा है.

अमित शाह के मामला हाथ में लेने के बाद दिल्ली में मामला कण्ट्रोल, रिकवरी रेट 80 प्रतिशत से भी ज्यादा
कभी तीन महीने तक दिल्ली की हालत बड़ी ही खराब और पतली हो रखी थी रिकवरी रेट भी 35 प्रतिशत के आस पास लटक रहा था फिर केजरीवाल ने केंद्र से मदद मांगी तो फिर एक तरह से पूरा चार्ज अमित शाह ने ही अपने हाथ में ले लिया और काफी समय वो अस्पताल, बेड्स, डॉक्टर्स आदि का काम राजधानी में देखे जा रहे है.

इसके फलस्वरूप आज दिल्ली में हालात ये हो गये है कि वहाँ पर रिकवरी रेट 80 से 85 प्रतिशत के बीच में तैर रहा है और अगर यही गति रही तो फिर ये जल्द ही 90 प्रतिशत को भी क्रॉस कर जाएगा जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड जैसा होगा क्योंकि दुनिया के बड़े बड़े लीडर ऐसा कर पाने में फेल हो रहे है जबकि शाह ने महज कुछ हफ्तों में चीजो को अच्छे से मेनेज किया है और केजरीवाल का भी इसमें पोजेटिव सहयोग रहा है इस बात को नकारा नही जा सकता है.

पीएम मोदी खुद दिल्ली का मॉडल बाकी राज्यों को अपनाने की सलाह दे चुके है और कही न कही महाराष्ट्र जैसे राज्यों को तो शाह से सीख लेने की वाकई में जरूरत है क्योंकि वहाँ पर नेता आदि राजनीति में ही रह गये है और लोगो की जान पर जान जा रही है.