मायावती बढ़ा रही है बीजेपी की तरफ दोस्ती के कदम, दिये ये संकेत

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राजनीति ऐसी जगह है जहाँ पर एक के  बाद एक अलग किस्म के गठजोड़ मिलते रहे है और जनता भी एक बार के लिए सकपका ही जाती है कि ये दो पोल आपस में मिल कैसे गये? अब महाराष्ट्र में ही देख लीजिये. शिवसेना और कांग्रेस जो कभी एक दुसरे की धुर विरोधी थी वो आपस में आ मिली क्योंकि सत्ता जो पानी थी. अब इन सबके बीच में यूपी में भी ऐसा ही कुछ करने की कोशिशे हो रही है जो शायद बीजेपी की सहमती मिली तो एक नए तरीके के गठजोड़ को जन्म दे सकती है.

मायावती लगातार बन रही बीजेपी की पक्षधर नजदीकियां बढाने की कोशिश
बसपा सुप्रीमो मायावती इन दिनों में बीजेपी की काफी पक्षधर बन रही है. राजस्थान में जब बीजेपी कांग्रेस आमने सामने थी तब बसपा ने गहलोत को न सिर्फ दगाबाज बताया बल्कि राजस्थान सरकार को हटाकर के वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाने की भी मांग की. यही काम मायावती ने संसद में भी किया है जब कई सारे क़ानून पारित हुए तब बसपा ने बीजेपी के पक्ष में वोट किया और मोदी शाह कई सारे कानूनों को पास करवा पाने समर्थ हो पाए है.

अब सवाल ये है कि मायावती के ये सब करने के पीछे का कारण क्या है? कारण बिलकुल साफ़ है कि कही न कही मायावती बीजेपी के करीब आने की कोशिश कर रही है और इसके पीछे का कारण बस यही माना जा रहा है कि मायावती अपनी खोयी हुई राजनीतिक जमीन को एक बार फिर से तलाश रही है और ऐसे में अगर वो बीजेपी के साथ में जुड जाती है तो जाहिर तौर पर भाजपा के सपोर्ट से वो फिर से एक बार उठ सकती है.

मगर बीजेपी मायावती का साथ देगी या फिर नही देगी इस बात में संशय है क्योंकि भाजपा को इससे कोई ख़ास फायदा नही है क्योंकि मायावती इन दिनों बिलकुल ही जमीन गँवा चुकी नेता है और ऊपर इस गठबंधन से बीजेपी के ही कई समर्थक नाराज हो सकते है.