इस पार्टी ने की राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की मांग, गहलोत को बताया दगाबाज

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इतने वक्त से राजस्थान में दो पार्टियों में भी आपस में भिडंत देखने को मिल रही थी. एक तरफ तो थी बीजेपी और दूसरी तरफ कांग्रेस. हालांकि भाजपा भी कुछ बोलने से बच ही रही थी क्योंकि लगातार गहलोत और पायलट आपस में गुत्थमगुत्था हो रखे थे. भाजपा कुछ कह रही थी लेकिन इतना ज्यादा बड़ा रोल नही था पर हाल ही में इस पूरे खेल में मायावती ने एंट्री ली है और इसके पीछे कारण भी है कि क्यों वो गहलोत के खिलाफ जा रही है. आखिर उनका नुकसान भी तो हुआ है.

मायावती ने की राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की मांग, वहाँ हो रहे असवैधानिक काम
पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच में मायावती की तरफ से हाल ही में दो ट्वीट किये गये जिसमे वो लिखती है कि सब लोग जानते है किस तरह से मुख्यमंत्री गहलोत ने बसपा के साथ में दगाबाजी करके दल बदल क़ानून का उल्लंघन किया और बसपा के विधायको को अपनी पार्टी में शामिल करवा लिया. अब तो इन लोगो ने फोन टैपिंग करवाके और भी बड़ा असवैधानिक काम किया है.

अभी जो स्थिति राजस्थान में बन रही है उस पर राज्यपाल को संज्ञान लेना चाहिए और राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी चाहिए ताकि वहां पर लोकतन्त्र में अस्थिरता पैदा न हो. मायावती ने काफी पॉइंट्स रखते हुए इस तरह की मांग की है और जब इस तरह की मांगे उठती है तो कही न कही इतना साफ़ हो जाता है कि कांग्रेस पार्टी के लिए मुसीबते कम नही हो रही है.

मायावती दरअसल इतना सब इसलिए भी कह रही है क्योंकि हाल ही में बसपा के कुछ विधायक जो कि राजस्थान में जीते थे उन्होंने कांग्रेस को समर्थन ही नही दिया बल्कि उसमे एक तरह से चले ही गये है और ऐसे में बसपा को काफी नुकसान देखना पड़ा क्योंकि उनकी राजस्थान जैसे राज्य में अब उपस्थिति शून्य हो गयी है और कारण वही है जिसे वो टारगेट कर रही है.