चीन को हुआ अपनी असली हैसियत का एहसास, आखिरकार झुक गया

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आज के दिन में सारा का सारा विश्व चीन के रवैये से परेशान हो रखा है इस बात से कोई भी इनकार नही कर सकता है.ऐसे में चीन को हर तरफ से घेरा गया है. लद्दाख में भारत ने अपना दम दिखाया तो साउथ चाइना सी के आस पास अमेरिकन एयरक्राफ्ट लगातार ड्रिल कर रहे थे. ऑस्ट्रलिया और जापान भी समंदर में उतर गये है तो वियतनाम भी सीना फुला रहा है. ऐसे में काफी वक्त से सर उठाकर के घूम रहे चीन को मजबूरी में ही सही लेकिन झुकना पड़ा है और इसमें सबसे बड़ा रोल अमेरिका का रहा है.

हमारा अमेरिका से संघर्ष करने का या फिर उससे संघर्ष करने का कोई इरादा नही है
चीन के विदेश मंत्रालय ने दो दिन पहले ये कहा था कि वो भारत के साथ में नरमी चाहते है और तनाव कम करना चाहते है. अब उनके विदेश मंत्री ने बयान जारी करते हुए कहा है कि हमारा अमेरिका से संघर्ष करने का कोई भी इरादा नही है और न ही हम उनकी जगह लेना चाहते है. हम तो चाहते है कि अमेरिका हमारे साथ में एक निष्पक्ष समझ को विकसित करे.

आगे चीन के विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि चीन तो अमेरिका के साथ में गैर विवादित और आपसी सम्मान से बने हुए रिश्ते बनाना चाहता है. कुल मिलाकर के चीन ने कह दिया है कि हम अमेरिका की जो नम्बर वन की जगह लेने का सपना देख रहे थे वो हमने छोड़ दिया है और अब हम बस अच्छे रिश्ते बनाकर के रहना चाहते है हमें रहने दो.  एक लम्बे वक्त से इतना आक्रामक रूख दिखने वाले चीन का यूँ झुक जाना बताता है कि उस पर काफी बड़े लेवल पर दबाव पड़ा है.

ये न सिर्फ अमेरिका की बल्कि भारत, ऑस्ट्रिया, ताइवान और जापान जैसे मित्र देशो की भी एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. हाँ इसका मतलब ये भी नही है कि चीन के साथ जो ट्रेड वार चलने लग रहा है वो रूक जायेगा. ये तो चलना ही है बस चीन ने कुछ नरमी दिखा दी है तो शायद इधर से भी हो जाएगी.