चीन को सबक सिखाने के लिये अमेरिका वाले रास्ते पर चलेगी मोदी सरकार

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एक लम्बे वक्त से भारत और चीन के बीच में तनातनी चल रही है चाहे वो सैन्य स्तर पर हो, मीडिया के लेवल पर हो, डिप्लोमेटिक लेवल पर हो या फिर राजनेतिक लेवल या आर्थिक मोर्चे पर हो. अब ये सब होना ही था क्योंकि चीन भारत को तेजी से विकसित होते हुए देख नही पा रहा है मगर अब हर चीज का एक रिएक्शन तो होता ही है और और भारत ने जब से रियेक्ट करना शुरू किया है तब से चीन की हालत बड़ी ही पतली होते हुए नजर आ रही है.

चीनी कम्पनियों के रद्द हो रहे टेंडर, इनके प्रोडक्ट्स पर भी लग सकता है भारी टैरिफ
अगर आपको जानकारी हो तो चीनी कम्पनियों के रेलवे और बीएसएनएल जैसी सरकारी कम्पनियों ने टेंडर रद्द किये है और इनको अब धीरे धीरे प्राइवेट कम्पनियों के कॉन्ट्रैक्ट्स से भी बाहर निकालने पर प्लानिंग चल रही है. इससे दो कदम आगे बढकर के मोदी सरकार एक ऐसा फैसला ले सकती है जो अब तक सिर्फ अमेरिकी सरकार ही लेते आयी है और वो है टैरिफ बढ़ाना. जब भी किसी देश को आर्थिक रूप से सबक सिखाना होता है तो ट्रम्प उन पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा देते है या फिर उनके प्रोडक्ट्स के इम्पोर्ट पर भारी भरकम टैरिफ लगा देते है.

अब उसी तरह मोदी सरकार चीन के लगभग 300 से भी अधिक प्रोडक्ट्स पर भारी भरकम टैरिफ लगा सकती है और इससे होगा एक बहुत ही बड़ा बदलाव. अगर भारत इम्पोर्ट पर टैरिफ और ड्यूटी बढ़ा देता है तो चीन के प्रोडक्ट्स का रेट अपने आप ही बहुत ही अधिक हो जायेगा और इससे वो भारतीय बाजारों में कम्पीट नही कर पाएंगे और धीरे धीरे बाजार से ही बाहर हो जायेंगे.

हालांकि अब तक इस पर कोई भी आधिकारिक बयान नही आया है मगर कहा जा रहा है कि आने वाले महीनो में नया टैरिफ स्ट्रक्चर आ सकता है और ये चीन के लिए बड़ा झटका हो सकता है. पहले ही मोदी सरकार चीन को डायरेक्ट एफडीआई करने से रोककर के अपने इरादे साफ़ कर चुकी है.