केजरीवाल ने किया यूपी बिहार पंजाब और हरियाणा वालो को अपने ही देश में पराया, लिया ये फैसला

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अरविन्द केजरीवाल पर लगातार इस बात के आरोप लगते रहे है कि वो क्षेत्रवाद की राजनीति करते रहे है जिसके चलते दिक्कते खड़ी होती है. जो लोग बाहर से आकर के अपने ही देश की राजधानी में रह रहे होते है वो कई दफा वहाँ की सरकार के कारण अपने आपको पराया महसूस करने लगते है. अभी हाल ही के फैसले से तो ऐसा ही कुछ नजर आ रहा है और कही न कही चिंता की बात भी है.

दिल्ली में नही होगा अब बाहर के राज्य के लोगो का इलाज, अपने हॉस्पिटल सिर्फ लोकल लोगो के लिए आरक्षित
किये आज की तारीख में दिल्ली में कई बाहरी लोग आकर के काम कर रहे है जिनमे से अधिकतर लोग यूपी, बिहार, हरियाणा और पंजाब से है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हरियाणा और यूपी की तो डायरेक्ट सीमा दिल्ली से लगती है और बिहार के नजदीक मेट्रो सिटी यही पडती है. ऐसे में रोजगार और इलाज जैसी चीजो के लिए ये लोग देश की राजधानी दिल्ली में आते ही रहते है. अगर सोच रहे है कि ये आगे भी ऐसे ही आते रहेंगे तो ये बिलकुल गलत सोच रहे है क्योंकि केजरीवाल ने सबको रोक दिया है.

केजरीवाल सरकार ने अपनी केबिनेट बैठक में फैसला लिया है कि अब दिल्ली में आने वाले सरकारी और प्राइवेट अस्पताल जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते है उनमे सिर्फ और सिर्फ दिल्ली के स्थानीय लोगो का इलाज होगा क्योंकि बाहर के लोगो का इलाज करने लगे तो फिर कुछ ही दिन में बेड्स भर जायेंगे. केंद्र सरकार के हॉस्पिटल जिन पर केजरीवाल की नही चल सकती उनमे तो कोई भी इलाज करवा सकता है जैसे दिल्ली एम्स.

अब सवाल ये है कि अगर कोई व्यक्ति नॉएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम जैसे शहरो में रहता है और किसी कारण से वो अभी दिल्ली में है और बीमार पड़ गया तो क्या केजरीवाल सरकार उसे दुसरे राज्य का कहकर के उसका इलाज करने से ही इनकार कर देगी? कई लोग इसकी सोशल मीडिया पर जमकर के आलोचना कर रहे है क्योंकि ये एनसीआर के कांसेप्ट के भी खिलाफ है.