मोदी ने चीन की हालत बिगाड़ने के लिये चला बड़ा दांव

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इन दिनों में भारत लगातार प्रयास कर रहा है कि किसी न किसी तरह से वो चीन को मेनुफक्चरिंग के मामले में रिप्लेस करे और दुनिया को एक नया ऑप्शन दे ताकि सबकी निर्भरता चीन के ऊपर कम हो जाए. ये अपने आप में जरूरी इसलिए भी है क्योंकि भारत भी कई मायनों में धीरे धीरे करके सस्ते के चक्कर में चीन पर निर्भर हो गया है लेकिन अब इन चीजो को बदलने का वक्त आ गया है जो कही न कही सरकार के स्तर पर ही सम्भव है. अब भारत इलेक्ट्रिक निर्माणकर्ता कम्पनियों को भारत में लाने के लिए बड़ा दांव चल चुका है.

मोबाइल और कई इलेक्ट्रॉनिक्स हो मेड इन इंडिया, इसके लिए 50 हजार करोड़ का होगा निवेश
आज की तारीख में चीन इलेक्ट्रॉनिक्स और ख़ास तौर पर मोबाइल्स फोन्स के निर्माण का हब बना हुआ है. अब भारत दुनिया को उसका एक और ऑप्शन देना चाहता है जिसके लिए सरकार ने 50 हजार करोड़ रूपये इस सेक्टर में निवेश करने का फैसला किया है. इसमें कुल तीन स्कीम्स लाई जा रही है जिसके जरिये उन कम्पनियों को बेनिफिट दिया जाएगा जो भारत में आकर के मेनुफक्चरिंग का काम करती है.

इसके लिए टॉप 5 बड़े मेनुफक्चररो को आमंत्रित भी किया जा रहा है कि वो आए और लाभ उठाए. अगर भारत ऐसा कर पाने में कामयाब हो जाता है तो फिर भारत में आने वाले समय में 10 लाख से ज्यादा जॉब्स सिर्फ मोबाइल निर्माण इकाईयो में ही पैदा हो सकती है जो कि एक बड़ा नम्बर है. इसके अलावा चीन को तो इससे तगड़ा झटका लगेगा ही अगर ये कम्पनियां अपना बिजनेस चीन को देने की बजाय भारत को देने का निर्णय करती है.

हालांकि अभी भी कई एक्सपर्ट्स कहते है कि ये चीजे चीन से कम्पनियों को भारत में शिफ्ट करने के लिए नाकाफी साबित होगी क्योंकि वहाँ पर वो आलरेडी फायदे में है. अगर भारत में वो फायदा उन्हें और ज्यादा मात्रा में नजर आता है तो फिर ऐसा हो पाना जाहिर तौर पर आसान हो ही जाएगा.