योगी जी ने पेश की बहुत बड़ी मिसाल, अपने ही गोरखनाथ मंदिर पर..

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योगी आदित्यनाथ अपने आप में एक ऐसे नेता है जो किसी भी कीमत पर अपने सच से अपनी जिम्मेदारी से और काम से समझौता नही करते है चाहे इसके लिए उनको इसके लिए कैसी ही कीमत क्यों न चुकानी पड़े? कितनो की ही नाराजगी क्यों न झेलनी पड़े? कितने ही लोगो से आलोचना क्यों न झेलनी पड़े? अब हाल ही में गोरखनाथ मंदिर के सम्बन्ध में उनके एक फैसले ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वो जनसेवक के तौर पर अपना हर काम इमानदारी के साथ करते है.

गोरखनाथ मंदिर परिसर से सटी दो दर्जन दूकाने आ रही थी सड़क निर्माण के आड़े, चलवा दिया बुलडोजर
गोरखनाथ मंदिर के पास से होकर के जो रोड गुजरती है वहाँ पर पहले टू लेन की छोटी सी रोड हुआ करती थी और धीरे धीरे अब ट्राफिक बढ गया है तो यहाँ पर एक फॉर लें बिछाने का प्लान है जो कि मोहद्दीपुर से जंगल कौड़िया तक जाना है. अब बाकी कई दुकाने आदि तोड़ी गई जो भी अतिक्रमण में थी या फिर सड़क के बीच में आ रही थी. मगर के बार के लिए नजरे ठिठक गयी क्योंकि अगली दो दर्जन दुकाने एक तरह से मंदिर परिसर से लगी थी जिसके पीठाधीश्वर खुद योगी जी है.

योगी जी ने विकास को प्राथमिकता दी न कि अपने निजी कार्य को और मंदिर से सटी दो दर्जन दुकानों पर भी बुलडोजर चल गया. हालांकि ऐसा नही है कि उनके साथ जो दूकान चला रहे उनके संग अन्याय किया गया है. जिनकी दुकाने गयी है ऊनको एक मल्टीस्टोरी काम्प्लेक्स बनाया जा रहा है उसमे एक एक दुकान दे दी जायेगी जहाँ से वो अपना व्य्यापर कर सकते है.

मंदिर के आस पास के इलाको में काफी जाम होता था और रोड छोटी होने के चलते लोगो को निकलने में भी दिक्कत होती थी लेकिन अब क्योंकि यहाँ पर फॉर लेन का निर्माण हो रहा है तो फिर ये आम लोगो के लिए काफी ज्यादा फायदे का सौदा होने जा रहा है.