मोदी ने राज्यों का ये बड़ा पॉवर ख़तम कर दिया

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अब हाल ही में राज्य और केंद्र के बीच में तकरार काफी बढ़ी है क्योंकि जिस तरह से देश भर में संक्रमण फैला है उसके बाद में कही न कही एक बात तो नजर आती है कि पिस तो आम आदमी ही रहा है. अब ऐसा हो भी को न? क्योंकि मोदी सरकार कही न कही अपने कई कामो के लिये राज्यों के सहयोग पर निर्भर करती है और राज्य जब विपक्षी पार्टी के होने के कारण आना कानी करते है तो दिक्कत होती है ऐसी ही दिक्कत श्रमिक ट्रेनों के संचालन में हो रही थी जहां पर राज्य सरकारे अपने राज्यों में ट्रेने आने से रोक रही थे जिसके चलते कई ट्रेने चल ही नही पाई और बिचारे मजदूर लटके रह गये.

रेलवे ने किया स्पष्ट, अब ट्रेन चलाने के लिये राज्यों की सहमति जरूरी नही
अब हाल ही में एक नयी एसओपी जारी हुई है जिसके तहत रेलवे को उस राज्य से परमिशन लेने की जरूरत नही पड़ेगी जहाँ पर रूट का समापन होना है यानी अब कोई ट्रेन बंगाल जा रही है तो ममता बनर्जी के पास में अब ये अधिकार नही रखा गया है कि वो ट्रेन को रोक दे या फिर उनसे पूछकर के उनसे सहमति ली जाए.

इससे रेलवे को काफी आसानी होगी क्योंकि कई राज्य जैसे बंगाल और तेलंगाना आदि में विपक्षी पार्टी की सरकारों के सही को ऑपरेशन की वजह से पहले यहाँ ट्रेनों के संचालन में बड़ी दिक्कत आ रही थी लेकिन अब ऐसा नही होगा अब तो रेलवे और मोदी जी जिधर चाहेंगे उधर रेल का इंजन घुमा देंगे और कही न कही ये उन गरीबो के लिये काफी हद तक मददगार साबित होने वाला है जो एक राज्य से दुसरे राज्य में जाकर के अपने घर पर रहना चाह रहे है और कुछ हद तक सुकून चाहते है.

आपको जानकारी हो तो कुछ दिन पहले ही अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच भी बंगाल में श्रमिक ट्रेन चलाने को लेकर के काफी माथापच्ची हुई थी. अब मोदी सरकार नही चाहती है कि ऐसा कुछ फिर से हो.