इन 5 बड़े कारणों के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी

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अभी हाल ही में मध्य प्रदेश की राजनीति में बहुत ही बड़ा भूचाल आया है और ये लाने वाला नेता एक ही है जिसे सभी लोग महाराज कहकर के भी बुलाते है. आप ठीक समझ रहे है हम बात कर रहे है ज्योतिरादित्य सिंधिया की जो कि राज्य की राजनीति में बहुत ही बड़े गेम चेंजर बनकर के सामने आये है और सभी को एक बार के लिए तो मानो उन्होंने ध्वस्त ही कर दिया है. सवेरे सवेरे उन्होंने सोनिया गांधी को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा भेज दिया और उनके पीछे दर्जनों विधायको ने पार्टी छोड़ दी.

मगर सिंधिया ने ये सब यूँही नही किया बल्कि इसके कारण कई महीनो से तैयार हो रहे थे जिसके चलते उन्होंने मजबूर होकर के ये बड़ा फैसला किया और कही न कही भाजपा की तरफ उन्होंने कदम बढ़ाया. हालांकि उन्होंने एक बार इशारे का इन्तजार जरुर किया था कि कब बीजेपी आने को कहे.

  1. ज्योतिरादित्य के पिता माधव राव सिंधिया भाजपा के बड़े दिग्गज नेता थे और उनके लिए इस कारण से बीजेपी में काफी ज्यादा ऑप्शन अपने आप ही खुले हुए थे और ये कांग्रेस से बेहतर थे.
  2. उनकी इच्छा थी कि वो प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन हाईकमान ने उन्हें दरकिनार करके कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया.
  3. उनके लोगो को मंत्रीमंडल में तो लिया गया लेकिन न तो सरकार में उनकी चली और न ही उनके नेता यानी सिंधिया की चलती थी जिसके चलते वो काफी अपमानित महसूस करते थे.
  4. सिंधिया को ये सब नही मिला तो वो राज्यसभा में जाना चाह रहे थे लेकिन दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने उनके टांग अड़ा दी और उनके राज्यसभा जाने के रास्ते भी लगभग बंद ही कर दिए थे.
  5. अब अंत में उनकी अनदेखी इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी कि सूत्र बताते है ज्योतिरादित्य ने सोनिया गांधी से मिलने के लिए भी वक्त माँगा था लेकिन उन्हें टाइम नही मिला और इन सभी तरह से अनदेखी होने से वो परेशान हो चले थे.

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी ने उनकी तरफ मदद का हाथ बढ़ाया और सिंधिया ने बिना कुछ सोचे समझे उसे थाम लिया.