उद्धव ठाकरे ने बदल दिया बीजेपी सरकार का ये फैसला, राज्यपाल ने किया साइन करने से मना

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महाराष्ट्र में अब सरकार बदल गयी है और पार्टी बदलते ही सत्ता के काम काज और सारे के सारे तौर तरीके भी बदल ही गये है जो कि हम लोग जान और देख रहे है मगर अब नीतिगत फ़ैसलो से लेकर सारे प्रशासनिक फैसले भी बदले जा रहे है जो कभी उद्धव ठाकरे के ही समर्थन वाली फडनवीस सरकार ने किये थे और ऐसी स्थिति में फ़िलहाल एक बार दोनों ही पार्टियों में ही नही बल्कि सरकार और राज्यपाल में भी ठन गयी है जो मीडिया के मुख्य पन्नो की खबर के रूप में उभर रही है.

फडनवीस सरकार ने बनाया था गाँव में डायरेक्ट सरपंच चुने जाने का नियम, उद्धव ठाकरे ने अध्यादेश लाकर किया पलटने का पूरा प्रयास 
जब महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडनवीस की सरकार थी तब उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर बदलाव लाते हुए एक फैसला लिया था जिसके तहत गाँव के सरपंच का चुनाव पंचो के द्वारा नही बल्कि गाँव के लोगो के द्वारा ही डायरेक्ट किया जायेगा. इससे गाँव के लोगो को अपना मुख्य प्रतिनिधि चुनने की छूट रहेगी और उन्हें पता रहेगा कि हम किस चेहरे को वोट डाल रहे है?

मगर अब उद्धव ठाकरे इससे बिलकुल उल्टा सोचते है जिसके चलते उनकी सरकार ने इसे पलटने का अध्यादेश पारित करते हुए इस फैसले को अपने स्तर पर तो पलट ही दिया है. नए अध्यादेश के तहत महाराष्ट्र में सरपंच का चुनाव गाँव के लोग डायरेक्ट नही कर सकेंगे बल्कि गाँव के लोग पंचो का चुनाव करेंगे जो कि ग्राम पंचायत के सदस्य होते है. भगत सिंह कोश्यारी जो कि महाराष्ट्र के राज्यपाल है उन्होंने इस फैसले पर हस्ताक्षर करने से ही मना कर दिया है.

उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे सरकार पहले इसका बिल विधान सभा में पास करवाए और उसके बाद में उनके पास सिग्नेचर करने के लिए भेजे. भगत सिंह कोश्यारी बीजेपी और संघ के काफी करीब माने जाते है और इस वजह से उनकी वर्तमान सरकार के साथ थोड़ी कम बनती है.