अपनी ही मोदी सरकार के इस बड़े फैसले के खिलाफ उतरे सुब्रमण्यम स्वामी, बताया पागलपन

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सुब्रमण्यम स्वामी कभी  भी वो नही करते या फिर कहते है जो उनके फायदे में या फिर हित में होता है बल्कि वो हमेशा वही करते है जो उन्हें ठीक लगता है और कही न कही ये चीज हमें बताती है कि सरकार को सही मार्ग दिखाने में उनकी आलोचना की भी काफी महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है और इस बात पर शक नही किया जा सकता है. वैसे तो स्वामी जी मोदी सरकार की सारी राजनीतिक और सामरिक नीतियों से खुश है लेकिन आर्थिक मंच पर वो कुछ संतुष्ट नजर नही आते है और उसी का जिक्र उन्होंने हाल ही में किया.

स्वामी जी ने जीएसटी को बताया 21वी सदी का सबसे बड़ा पागलपन, इसकी जटिलता को आम व्यापारी समझ नही पा रहे
सुब्रमण्यम स्वामी हाल ही में बात कर रहे थे तब उन्होंने वैसे सरकार की तारीफ़ की लेकिन एक मोर्चे पर विफलता को लेकर के भी आगाह किया. स्वामी कहते है कि जो लोग भ्रष्टाचार से लड़ते है और निवेश करते है उन्हें पुरस्कृत करने की जरूरत है. आप इन लोगो को आयकर और जीएसटी से जो इस 21वी सदी का सबसे बड़ा पागलपन है उससे आतं’कित मत करिये. ये इतना जटिल है कि लोग समझ ही नही पा रहे है कि कौनसा फॉर्म कहाँ भरना है?

स्वामी जी ने इस मसले पर एक किस्सा भी शेयर किया और बताया कि कोई राजस्थान से मेरे पास आया और कहने लगा हमारे पास में बिजली नही है हम इस फॉर्म को कैसे अपलोड करे? इस पर मेने उसे कहा कि इसे अपने माथे पर रखो और माथे पर ही अपलोड कर दो और प्रधानमंत्री के पास जाकर के उनसे कहो.

कुल मिलाकर के स्वामी जी का मानना है कि मोदी सरकार छोटे लोगो को भी मद्देनजर रखते हुए आर्थिक सुधार करे क्योंकि इस तरह के फैसलों से कही न कही उन पर गहरा असर पड़ रहा है और ये ही देश की रीढ़ की हड्डी भी है. अगर इन्हें नुकसान होगा तो देश का आगे बढ़ पाना ही मुश्किल होगा.