योगी आदित्यनाथ को प्रयागराज हाई कोर्ट से झटका लगा है

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उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कही न कही अपने सीधे सपाट अंदाज के लिए ही देश भर में जाने जाते है. वो जब भी जो भी फैसला करते है तो उसमे ये नही सोचते है कि इसके परिणाम क्या हो सकते है? मगर लगता है कि उनका ये अंदाज कोर्ट को नही भाया है और इस वजह से उनके हाल ही के फैसले पर रोक लगा दी गयी है जो नागरिकता क़ानून पर हो रहे प्रदर्शनों से जुड़ा था और कही न कही ये यूपी सरकार के लिए एक झटके की तरह देखा जा रहा है.

प्रदर्शनों में हुए नुकसान की भरपाई लोगो से करने के आदेश पर लगी रोक
प्रयागराज हाई कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी कि ये तरीका जो योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपनाया है वो वैध नही है जिसके बाद संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने इस पर अगला आदेश आने तक रोक लगा दी है. याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक सम्पति के नुकसान का आंकलन करने का अधिकार सिर्फ हाई कोर्ट के सिटिंग जज, सेवानिवृत जज या फिर डिस्ट्रिक जज को ही है जबकि ये आदेश एसडीएम सिटी के द्वारा जारी करवाया गया है.

कोर्ट ने इसमें साफ़ तौर पर कहा है कि एसडीएम सिटी को इस तरह के नोटिस जारी करने का अधिकार नही है. ऐसे में योगी सरकार जो प्रदर्शनकारियों से पैसा वसूलने का कार्य कर रही थी ताकि राज्य के घाटे की भरपाई की जा सके वो तो बीच में ही लटक गया. हालांकि इसका अर्थ ये भी नही है कि ये हमेशा के लिए रूक गया है, अगला आदेश सरकार के पक्ष में हो भी सकता है क्योंकि क़ानूनन भरपाई करवाना तो सरकार का अधिकार है बस प्रोसीजर बदल सकता है.

मगर चिंता की बात ये है कि अगर मामले में देरी होती है तो सबूत कमजोर पड़ सकते है और ऐसे में फिर प्रशासन के लिए लोगो को पहचानना, ढूंढना और फिर उनसे भरपाई करवा पाना बेहद ही मुश्किल हो जाएगा ये भी एक बड़ी समस्या है.