मोदी सरकार ने चलाई महाकाल एक्सप्रेस और अंदर बनाया भोलेनाथ का मन्दिर, भड़के ओवैसी ने कहा ऐसा

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भारत में जब से मोदी सरकार आयी है तब से कुछ चीजे ऐसी हुई है जो पिछले 70 साल में नही हुई है. कई लोग है जो इससे बेहद ही खुश है तो कुछ लोग ऐसे भी है जो कि नाराज है. अभी की बात ले लीजिये मोदी सरकार ने इस देश की दूसरी प्राइवेट ट्रेन को मंजूरी दे दी है जिसे चलाने का काम आईआरसीटीसी को सौंपा गया है. अब ट्रेन तो तैयार हो गयी और इसे चलाने को लेकर के भी देश भर में बाते हो रही है मगर कुछ है जो विवाद का पात्र बन गया.

ट्रेन में पूजा के लिये बनाया गया था अस्थायी मंदिर, ओवैसी ने संविधान का हवाला देकर पाठ पढाना शुरू कर दिया
महाकाल एक्सप्रेस देश के तीन ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने का काम करेगी जिसमे इंदौर का ओंकारेश्वर, काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकालेश्वर शामिल है. इस ट्रेन की कुछ तस्वीरे वायरल हुई जिसमें ट्रेन की एक बर्थ पर अस्थायी मंदिर बनाया गया और उसकी पूजा भी हुई. सब कुछ ठीक चला और लोग भी खुश थे कि ट्रेन की शुरुआत भोलेनाथ की पूजा के साथ हो रही है तो सब अच्छा होगा.

मगर ओवैसी को ये सब अच्च्छा नही लगा और उन्होंने ट्विटर पर संविधान की प्रस्तावना ट्वीट करते हुए पीएम को बताया कि भारत एक सेक्युलर देश है और यहाँ पर ये सब नही कर सकते है. हालांकि आईआरसीटीसी ने बादमे सफाई भी दी और कहा कि ये परमानेंट मंदिर नही है बल्कि पहले दिन के लिए है जब स्टाफ के लोगो ने ट्रेन के शुरू होने से पहले पूजा की थी तब इसे बनाया गया था. ये आगे कोई बर्थ नही घेरेगा.

माना जा रहा है कि ये मंदिर परमानेंट था लेकिन ओवैसी और तमाम नेताओं के आपत्ति करने के बाद में आईआरसीटीसी ने अपनी कम्पनी की साख बचाने के लिए इसे अस्थायी मन्दिर बताकर के इसे हटाने का फैसला किया. आईआरसीटीसी की ये लगातार तीसरी प्राइवेट ट्रेन है जिसे वो संचालित करेगा और काफी अच्छी कमाई भी शायद कर पायेगा.