आज जीतने के बावजूद मनीष सिसोदिया की वजह से केजरीवाल को शर्मिंदगी उठानी पड़ी

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दिल्ली के चुनावों का परिणाम अब पानी की तरह साफ़ हो गये है और रिजल्ट को देखकर के हर कोई कह सकता है कि केजरीवाल अपने सारे एजेंडों के साथ में विजयी रहे और भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. अब इतना सब कुछ होने के बाद भी चाहे विजयी हो गयी हो लेकिन ये चुनावी परिणाम मनीष सिसोदिया का कद छोटा जरुर कर देंगे क्योंकि वो खुदको पहले की तरह बेहतर साबित नही कर पाए और एक बार के लिए तो ऐसा लगा था मानो वो चुनाव हार ही जायेंगे.

शुरूआती चरणों में पिछड़े रहे मनीष सिसोदिया के वोट, आखिर में जाकर जैसे तैसे बेड़ा पार लगा
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल के बाद दूसरा बड़ा चेहरा कहे जाने वाले मनीष सिसोदिया इस बार दिल्ली में हारते हारते बचे. जहाँ आम आदमी पार्टी के दुसरे बड़े नेताओं ने बड़े मार्जिन से जीत हासिल की वही दूसरी तरफ मनीष सिसोदिया शुरुआत के लगभग सारे राउंड में कभी 500 तो कभी 1500 वोटो पर पिछड़ते नजर आये. आखिर में जाकर 13वे राउंड में उन्होंने बढ़त ली और 3 हजार के करीब वोटो से आगे हुए और जीतकर सांस ली. अंत तक उनके पास में वोटो की संख्या 2196 ही ज्यादा थी, यानी एकाध राउंड आगे पीछे होता तो उनकी हार तय थी.

एक बार के लिए ऐसा माहौल था मानो उनका पत्ता कट गया है और इसके पीछे का सबसे कारण कही न कही शाहीन बाग़ माना जा रहा है. दरअसल इस बार के दिल्ली चुनावों में जहाँ अरविन्द केजरीवाल ने शाहीन बाग़ पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया था वही दूसरी तरफ मनीष सिसोदिया ने खुलकर के ये कह दिया कि वो शाहीन बाग़ में प्रदर्शन करने वालो के साथ खड़े है जिससे वहाँ के स्थानीय लोगो में काफी नाराजगी हुई क्योंकि दिल्ली के लोग ही शाहीन बाग़ की वजह से त्रस्त हुए बैठे है.

हालांकि अब इसका परिणाम तो आ चुका है और मनीष सिसोदिया छोटे से मार्जिन से ही सही लेकिन जीत गये है पर अब इसके बाद में उन्हें पार्टी के द्वारा अन्दर ही अन्दर हिदायत मिलनी तय है या फिर उनकी घटी लोकप्रियता के चलते उनके कद को भी छोटा किया जा सकता है.