सुप्रीम कोर्ट ने SC और ST वर्ग को आरक्षण पर बहुत बड़ा झटका दिया

386

आरक्षण की लड़ाई तो जब से ये देश बना है तब से ही चल रही है. कोई इसके पक्ष में नजर आता है तो कोई इसके विरोध में खड़ा होता है. सभी अपने अपने फायदे के मुताबिक़ अपना रास्ता तय करते है लेकिन इसके बीच में कही न कही सरकार फंस जाती है और इस बार एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार जातिवादी राजनीति में फंसते हुए नजर आ रही है जब से सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से उलट जाकर के कुछ फैसला दिया है और इसे आरक्षण के अंत की शुरुआत के तौर पर देखा जाने लगा है.

सरकारी नौकरियों में आरक्षण नही है मौलिक अधिकार, कोई भी अदालत नही जारी कर सकती राज्य सरकारों को आरक्षण देने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में जज गुप्ता और नागेश्वर राव की बेंच ने एससी और एसटी आरक्षण सम्बंधित मामलो पर सुनवाई की और इस पर पूरा सब कुछ ध्यान रखने के बाद में फैसला देते हुए कहा कि सरकारी नौकरी में आरक्षण कोई लोगो का मौलिक अधिकार नही है और न ही कोई निचली अदालत किसी राज्य सरकार को निर्देश देकर के बाध्य कर सकती है कि वो आरक्षण दे.

ये राज्य सरकारों के विवेक और उनकी समझ पर निर्भर करता है कि वो आरक्षण देना चाहते है या फिर नही या फिर कितना देना चाहते है? अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का कही न कही राजनीतिकरण करने का प्रयास हो रहा है और लगातार कांग्रेस और बाकी पार्टियां आरोप लगा रही है कि इसकी आड़ में बीजेपी देश से आरक्षण की व्यवस्था ही खत्म कर देना चाहती है. हालांकि भाजपा का ऐसा कुछ भी कहने या फिर करने से पूरी तरह से इनकार है.

अब इस फैसले के बाद में कही न कही राजनीति तो होगी. आपको बता दे हाई कोर्ट ने इसके उलट फैसला दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए पलट दिया है और माना है कि सरकारी नौकरी में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नही है.