अमित शाह ने महबूबा और अब्दुल्ला के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया

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कश्मीर जो आज से एक साल पहले तक हुआ करता था वो अब नही रहा है. काफी कुछ है जो बदल चुका है सारी जमीन वहां की केंद्र सरकार के कंट्रोल में है, नजरबंद रखे हुए नेता भी काबू में है और तो और वहाँ पर पहले के मुकाबले काफी शान्ति हुई है ऐसा क्लेम भी किया जा रहा है. अब सभी को लगा था कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद में इतने महीने बीत चुके है तो शायद थोड़ी ढील नेताओं पर बरती जायेगी मगर शाह का मूड तो कुछ और ही लग रहा है.

महबूबा और उमर अब्दुल्ला पर लगा पीएसए, बिना ट्रायल 6 महीने बंद रखा जा सकेगा
अब जब कश्मीर में काफी शान्ति आने लगी है तो कई नेता है जिन्हें छोड़ा भी गया है मगर दो बड़े नेता जो मुख्यमंत्री भी रहे है महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला इन दोनों पर सरकार ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगा दिया है जिसके तहत इन दोनों ही नेताओं को बिना किसी भी तरह के कोर्ट ट्रायल के भी अगले 6 महीने तक जेल में तक रखा जा सकेगा और इस पर कोई क़ानूनन सवाल नही उठा सकेगा. पीएसए एक्ट सरकार को ऐसा करने की ताकत देता है जिसे आज से कई दशक पहले पास किया गया था..

अब कश्मीर से तो इसका विरोध नही हो रहा है मगर विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में उतर आयी है. चिदम्बरम ने इसे लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन बताया है. बाकी के विपक्षी दल भी कुछ ऐसा ही कह रहे है जबकि लोगो का मानना है कि ये एक तरह का प्रिवेंटिव डिटेंशन है जो सरकार को कुछ एक परिस्थितियों में लेना ही पड़ता है. खैर अभी सरकार इस मामले पर कुछ बयान जल्द ही जारी कर सकती है ऐसा सूत्र बताते है.

रिपोर्ट्स की माने तो ऐसे नेता जो कश्मीर से है जिनके व्यवहार में नरमी नजर आ रही है और जो सरकार कोा आश्वासन दे रहे है कि वो बाहर आकर के माहौल खराब नही करेंगे उन्हें धीरे धीरे करके छोड़ा जा रहा है मगर महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं पर सरकार कोई रिस्क नही लेना चाह रही है जो साफ दिख रहा है.