मोदी ने CAA के खिलाफ सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय चाल को नाकाम कर दिया

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फिलहाल देश भर में एक माहौल बना हुआ है जहां एक तरफ तो वो लोग है जो कही न कही बीजेपी के साथ नागरिकता क़ानून के समर्थन में खड़े है जबकि दूसरी तरफ वो लोग है जो इस कानून के विरोध में खड़े हो रखे है और ये बात अब यही देश के भीतर ही नही रूक रही है बल्कि बाहर तक चली गयी है. पाक आर देश के अन्दर के ही कुछ लोग लगातार भारत पर ये दबाव बनाने का प्रयास इंटरनेशनल लेवल पर भी कर रहे है ताकि सरकार झुक जाए. इसका प्रयास यूरोपियन यूनियन में भी हुआ.

नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाली थी यूरोपियन युनियन की संसद, मोदी सरकार के दबाव में टला
यूरोप की सबसे बड़ी संसद जिसमे कई सारे देश शामिल है उसके द्वारा एक प्रस्ताव लाने की तैयारी थी जिसमे वो CAA के प्रति विरोध जताते और भारत की आलोचना करते. इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद में यूरोप आधिकारिक तौर पर इसका विरोधी हो जाता लेकिन ऐसा कुछ हो पाता उससे पहले ही मोदी सरकार इसके विरोध में उतर गयी और उनके सदन पर दबाव डाला.

पहले तो भारत की तरफ से बयान जारी कर इसे आंतरिक मामला बताया गया और इसके बाद में सदन के स्पीकर ओम बिडला ने पत्र लिखकर के इस पर कड़ी आपत्ति जताई. जिसके बाद में यूरोपियन सदन ने पहले तो इस पर से पल्ला झाडकर के ये कहा कि ये कोई आधिकारिक नही है बस कुछ एक सांसदों का समूह ऐसा करना चाह रहा है और इसके बाद में अब इस प्रस्ताव को ही सदन से हटा लिया गया है यानी फ़िलहाल के लिए यूरोपियन युनियन का सदन इसके खिलाफ कोई प्रस्ताव नही लाएगा और इसे मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है.

ये अपने आप में काफी बड़ी बात है क्योंकि जिस तरह से पाक और भारत के अन्दर ही रहकर के भारत का विरोध करने का प्रयास करने वालो को मुंह की खानी पड़ी है उसके बाद में एक बार फिर से राष्ट्रवादी ताकतों के हौसले बुलंद हो गये है.