सुप्रीम कोर्ट में दायर महात्मा गांधी को भारत रत्न देने की याचिका, जज ने ये कहते हुए खारिच कर दी

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महात्मा गाँधी को इस देश का राष्ट्रपिता तक कहा जाता है और सभी जानते है कि गांधी जी ने इस देश के लिए काफी कुछ किया है. हाँ कई लोग है और बहुत बड़ी जनसँख्या है जो उनके कामो को शायद पसंद न भी करती हो क्योंकि वैचारिक मतभेद सभी में होते है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुंची थी जिसमे गांधी जी की महानता देखते हुए उन्हें भारत रत्न दिलवाने की याचिका दी गयी थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कारणों के चलते हटा ही दिया. हाँ कारण वाजिब भी लगता है.

कोर्ट ने कहा, गांधी जी इन सभी औपचारिकताओ से ऊपर है
सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका को लेकर के सुनवाई के दौरान जज जस्टिस बोबडे की बेंच ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता है. साथ ही गांधी जी जनता की नजर में तो इन सभी औपचारिक सम्मानों से बहुत ही ऊपर है. जज ने ये भी कहा कि वो याचिकाकर्ता की भावना का सम्मान करते है लेकिन वो ऐसा नही कर सकते है और ये कहते हुए इस याचिका को पूरी तरह से खारिच ही कर दिया गया.

कोर्ट ने साथ ही ये भी कहा है कि कोर्ट इस सम्बन्ध में सरकार को कोई निर्देश जारी भी नही कर सकता है. हाँ इस पर प्रतिवेदन जरुर किया जा सकता है और महात्मा गांधी ने भारत की स्वतंत्रता आँदोल में जो भूमिका निभायी थी वो किसी भी तरह की औपचारिकता से बढ़कर के कहा जाएगा. ऐसी बहुत ही कम याचिकाये होती है जिन्हें सकारात्मक माना जाता है और बिना डांट लगाये उन्हें जज खारिच कर देते है और ये भी उनमे से ही एक थी.

महात्मा गांधी को भारत रत्न देने की मांग काफी वक्त से उठती रही है. उनके अलावा मांग तो लोग भगत सिंह और आजाद आदि को भी ऐसे ही सम्मान देने की बात करते है लेकिन तर्क ये दिया जाता है कि ये लोग तो राष्ट्र के निर्माणकर्ता थे इस वजह से ये लोग इन सभी सम्मानों से भी ऊँचे है तो इन्हें ये सम्मान देना इनका कद छोटा कर देने जैसा होगा.