जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने भेजा केंद्र सरकार को ये नोटिस

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देश भर में एक आवाज है जो काफी लम्बे समय से उठ रही है और वो आवाज है जनसँख्या को रोकने की. हम सभी जानते है कि अभी कुछ समय में देश की जनसँख्या अनुमान के तौर पर 150 करोड़ के पार पहुँच जायेगी और हम चीन को भी पछाड़ देंगे. इतनी बड़ी जनसँख्या के लिए बाकी संसाधन तो दूर पीने का पानी तक उपलब्ध करवाते रहना एक बड़ी चुनौती होगी. ऐसे में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून की मांग लम्बे समय से उठती रहती है जिस पर एक पिटीशन लेकर के बीजेपी के ही नेता अश्विनी उपाध्याय सुप्रीम कोर्ट पहुँच गये है.

जनसँख्या नियंत्रण सम्बंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
पहले दिल्ली हाई कोर्ट में ये याचिका गयी थी लेकिन इस याचिका को ये कहकर के खारिच कर दिया गया कि क़ानून बनाना संसद का काम है और हम संसद को कोई निर्देश जारी नही करना चाहते है. अब अश्विनी उपाध्याय जो कि बीजेपी के ही नेता है वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और संसाधनों की कमी और बढती जनसँख्या पर कुछ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है.

अश्विनी कुमार उपाध्याय जो कि एक वकील भी है उनकी इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया है और इसके बाद में केंद्र में बैठी मोदी सरकार को एक नोटिस जारी किया है जिसमे उनसे जानकारी मांगी है कि इसमें क्या किया जा सकता है या फिर क्या कुछ हो सकता है? आपको बता दे तीन तलाक में भी इसी तरह से शुरुआत हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के निदेश से ही केंद्र सरकार ने ये क़ानून बनाया था. अब ऐसा लग रहा है मानो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को ही ढाल बनाकर के केंद्र सरकार अब जनसंख्या नियंत्रण क़ानून भी ला सकती है.

हालांकि अभी इसमें समय है क्योंकि अभी कुछ वक्त ही हुआ है सीएए लागू हुए और ऐसे समय में अगर एक और क़ानून ले आते है तो फिर लोगो को समझाना थोडा मुश्किल हो सकता है. संभव है कि 2020 का अंत आते आते इस पर सरकार कुछ करे.