सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ‘नागरिकता संशोधन क़ानून पर रोक’ लगाने की याचिका पर फैसला

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सरकार ने हाल ही में एक बिल पास किया है और इस बात से कोई भी इनकार नही कर सकता है कि जो बिल पास किया गया है वो अपने आप में काफी बड़ा और आमूलचूक परिवर्तन है. इस बिल के पास होने के बाद में ये क़ानून बन गया है जो पड़ोस के तीन देशो में रहने वाले अल्पसंख्यको को भारत में संरक्षण देने में सहायता करेगा और कई लोग इससे खुश है लेकिन कुछ लोग है जो इससे बेहद ही नाराजगी भी जता रहे है जिन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ रूख भी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने किया फ़िलहाल इस एक्ट पर कोई भी स्टे लगाने से इनकार, 22 को अगली सुनवाई
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि ये आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है, असम में भी हालात खराब हो रहे है इसलिए इसपर पहले तो एक स्टे लगा दिया जाए यानी अभी के लिए इस एक्ट पर रोक लगा दी जाए. इसके जवाब में सरकार की तरफ से पेश हुए अटोर्नी जनरल ने कहा कि इस पर स्टे लगाना एक एक्ट को चेलेंज करने के समान होगा इसलिए ऐसा न किया जाये.

ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बोबडे ने अभी के लिए एक फैसला दिया है कि वो इस पर किसी भी तरह की रोक या फिर स्टे नही लगायेंगे. हाँ अभी तक ये केस बंद नही हुआ है तो अगली सुनवाई 22 जनवरी को होनी है जिसमें याचिकाकर्ताओं को ये साबित करना होगा कि ये क़ानून असवैधानिक है. इसमें ल्गातातार आर्टिकल 14 के उल्लंघन की बात की जा रही है जिसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह खुद ही संसद में खड़े होकर के दे चुके है.

ऐसे में संविधान विशेषज्ञ तो यही कहते है कि इस तरह की याचिकाये किसी भी तरह से कोर्ट में टिक ही नही पायेगी. खैर अभी तो इसके लिए 22 जनवरी तक का इंतजार करना होगा तभी पता चल सकेगा कि आखिर सुप्रीम कोर्ट क्या अंतिम डिसीजन देता है. अभी के लिए तो सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या लॉ एंड आर्डर की है.