उद्धव ठाकरे ने दिया संकेत, उन्होंने अभी भी हिंदुत्व की विचारधारा नही छोड़ी है

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उद्धव ठाकरे पिछले कुछ समय में बहुत ही ज्यादा विवादों में रहे है और इस बात में कोई भी शक नही है क्योंकि जिस तरह से ठाकरे ने पहले बीजेपी का साथ छोड़ा और इसके बाद में वो कांग्रेस और एनसीपी से जा मिले जो उनके धुर विरोधी शुरू के ही समय से रहे है. ये बात तो हम लोग जानते ही है जिसके चलते उनकी खूब आलोचना भी हुई है लेकिन इन दिनों में संसद में जो कुछ भी हुआ है उसने साबित कर दिया कि ठाकरे चाहे बहकावे में आ गये है लेकिन अभी भी अपनी कोर लाइन छोड़ी नही है.

लोकसभा में किया नागरिकता संशोधन बिल पर बीजेपी का समर्थन, कांग्रेस के धमकाने पर भी नही किया राज्यसभा में खिलाफ में वोट
लोकसभा में जब वोटिंग की बारी आयी नागरिकता बिल पर तो शिवसेना ने साफ़ साफ़ तौर पर बीजेपी का समर्थन कर दिया और जब ये बात सोनिया गांधी तक पहुंची तो उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि अगर वो राज्यसभा में भी इस बिल का समर्थन करते है तो फिर हम महाराष्ट्र में सरकार तक गिरा सकते है.

अब उद्धव ठाकरे धर्म संकट में फंस गये क्योंकि एक तरफ इज्जत थी और दूसरी तरफ थी विचारधारा. उद्धव ठाकरे ने इतना सब होने के बाद भी इस बिल का विरोध नही किया और जब शाह ने राज्यसभा में ये बिल पेश किया तो उद्धव ठाकरे की पार्टी के राज्यसभा विधायक सदन से उठकर के चले गये. अगर वो वहाँ पर रहते तो उन्हें मजबूरी में ही सही लेकिन कांग्रेस के दबाव में इस बिल के खिलाफ में वोट डालना पडा और इनके चले जाने से बीजेपी के लिए जीत पाना बेहद ही आसान हो गया.

इस पर कई लोग उद्धव ठाकरे की बात को अप्रीशिएट भी कर रहे है तो कुछ लोग कह रहे है कि उद्धव ठाकरे बड़े ही गजब के भंवर में फंस चुके है जहाँ पर वो न तो इधर के रह गये है और न ही उधर के हो पाये है, ये अपने आप में सोचने वाली बात भी तो है.