राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फिर आया फैसला, मुस्लिम बोर्ड ने डाली थी पुनर्विचार याचिका

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राम मंदिर अपने आप में हिन्दू और मुस्लिमो के बीच में काफी लम्बे समय से एक बहुत ही बड़ा मुद्दा रहा है जिसने कही न कही लोगो के बीच में तनाव भी पैदा किया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ही समय पहले इस पर फैसला देते हुए राम जन्मभूमि हिन्दू पक्ष को दे दी. अब इसे फाइनल फैसला समझा गया लेकिन अभी भी पुनर्विचार याचिका देने का अधिकार तो पक्षों के के पास में था ही जिसका उपयोग मुस्लिम पक्ष ने किया और इस पर याचिका दायर भी की थी.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत 17 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, एक झटके में खारिच हो गयी सारी उम्मीदे
सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाए दायर हुई जो राम मंदिर पर आये फैसले से सहमत नही थी जिनमे अधिकतर मुस्लिम पक्ष के ही लोग थे. इसकी सुनवाई करने के लिए पांच जजों की बेंच बैठी जिसमें चीफ जस्टिस बोबडे खुद शामिल थे और उन्होंने इस पूरी सुनवाई को पूरी तरह से खारिच कर दिया है यानी राम मंदिर पर जो फैसला रंजन गोगोई बेंच ने दिया था अब वही यथावत रहेगा.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को बेहद ही दुर्भाग्य से भरा हुआ बताया है और कहा है कि वो अपने वकील से आगे इस मामले में चर्चा करेंगे और बतायेंगे कि आगे क्या कदम उठाया जा सकता है? हालांकि इस मामले में जो मुख्य वादी सुन्नी वफ्फ़ बोर्ड है उसने तो अपने हाथ कबके पीछे खींच लिये है और उनका कहना है कि वो अब किसी भी कीमत पर फिर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लेकर के नही जायेंगे.

वही दूसरी तरफ बात करे अगर हम राम मंदिर के पक्षकारो की तो वहां पर भी काफी बहस चल रही है कि राम मंदिर के ट्रस्ट में कौन कौन होगा? सरकार इस पर फ़िलहाल काम कर रही है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अभी तीन महीने का समय दिया है.