मुस्लिमो को भी भारत की नागरिकता देने पर अमित शाह ने दिया बड़ा बयान

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अभी हाल ही में भारत सरकार ने देश की नागरिकता के कई मूल सिद्धांतो में बदलाव किये है जिनके चलते पडोसी देशो में रहने वाले अल्पसंख्यक भारत में आकर के रह सकेंगे और उन्हें नागरिकता भी मिलेगी. अब इस पर तमाम तरह की बाते हुई पक्ष ने खूब सवाल भी उठाये लेकिन एक सबसे बड़ा सवाल सभी ने ये उठाया कि अगर पड़ोस में रहने वाले हिन्दू और इसाइयो को भारत में नागरिकता लेने में प्राथमिकता देने की बात हो रही है तो फिर पड़ोस में रहने वाले या फिर भारत से बाहर रहने वाले मुस्लिमो को को क्यों नही?

शाह ने दिया कडा जवाब, आप क्या चाहते है पूरी दुनिया से मुसलमान आकर के भारत में बस जाए
अमित शाह ने आज राज्यसभा की टेबल पर बिल रखा और बयान जारी करते हुए कहा कि ये बिल उन अल्पसंख्यको को राहत देने का काम करेगा जो दर दर की ठोकरे खा रहे है जिन पर पड़ोस में ज्यादती होती है. रही बात बाहर के देशो को मुस्लिमो को नागिकता देने की तो आप क्या चाहते है दुनिया भर के देशो के मुसलमान भारत में आने लगे और हम उन्हें नागरिकता दे? ऐसे देश कैसे चलेगा?

शाह ने साफ़ तौर पर ये कहा कि ये बात उनके घोषणापत्र में लिखी हुई थी कि वो नागरिकता संसोधन बिल लायेंगे और वो वही काम पूरा कर रहे है क्योंकि जनता ने इसी के लिये उन्हें वोट दिया है. शाह ने लोकसभा में बोलने के दौरान ये तक कहा कि इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था और अगर कांग्रेस ये विभाजन न करती तो इस तरह का क़ानून लाने की नौबत ही न आती.

खैर बाते तो तमाम होती रहेगी लेकिन एक अखंड सत्य ये है कि अब बीजेपी दोनों सदनों में साथी दलों को मिलाकर के बहुमत पर है और ऐसे में भाजपा को कोई भी क़ानून पास करवाने के कांग्रेस चाहकर के भी नही रोक सकती है.