मुख्यमंत्री बनते ही मोदी का ये सपना तोड़ना चाहते है उद्धव ठाकरे

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उद्धव ठाकरे ने इन दिनों एक बड़ी लड़ाई लड़ी है और जाहिर तौर पर वो जीते है. अब जीतने के लिये उन्होंने तरीका चाहे कितना ही अनैतिक और गलत चुना हो लेकिन जीत तो आखिर जीत ही होती है और आपको सत्ता मिल ही जाती है. अब सत्ता मिल गयी है और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान भी हो चुके है मगर अब कही न कही वो अपने एजेंडे वाली राजनीति करेंगे जिससे उन्हें लम्बे समय तक मराठियों के वोट मिलते रहे और वो जीत हासिल करते रहे, अब इसकी कीमत चाहे आम जनता को ही क्यों न चुकानी पड़े?

बुलेट ट्रेन में अडंगा लगाएगी महाराष्ट्र सरकार, पर्यावरण बचाने की दे रही नाटकीय दुहाई
मोदी सरकार की एक बड़ी ही ख़ास और महत्त्वकांक्षी परियोजना है बुलेट ट्रेन. ये ट्रेन अहमदाबाद से लेकर मुंबई तक चलायी जानी थी और केंद्र राज्य दोनों जगह पर भाजपा सरकार थी तो उनके लिये सब करना आसान भी था. काफी पैसा महाराष्ट्र सरकार के खजाने से भी आने वाला था लेकिन अब शिवसेना की सरकार आते ही इस बुलेट ट्रेन परियोजना पर संकट के बादल मंडराने लग गये है और मोदी सरकार चाहकर के भी कुछ कर नही पायेगी.

शिवसेना बुलेट ट्रेन परियोजना के विरोध कर रही है और कह रही है कि इससे हजारो पेड़ रास्ते में पड़ेंगे वो काटने पड़ेंगे इससे पर्यावरण को नुकसान होगा. अब इसके पीछे असली मकसद तो कुछ और ही है दरअसल शिवसेना नही चाहती कि बुलेट ट्रेन जैसा बड़ा तोहफा मोदी सरकार मुंबई शहर को दे क्योंकि अगर ऐसा वो कर देती है तो इससे व्यापार तेज होगा, गुजरातियों से महाराष्ट्र का व्यापार मजबूत होगा, वहां की राजनीति भी यहाँ हावि होने लगेगी और इससे बीजेपी को महाराष्ट्र में बढ़त मिल सकती है.

ऐसा ही बीजेपी का एक और मेट्रो प्रोजेक्ट जो बीजेपी ने मुंबई में शहर में शुरू किया था और उसका आरे में मेट्रो शेड बन रहा था उसे भी उद्धव ठाकरे ने रूकवा दिया है. अगर शिवसेना इस तरह से सिर्फ मराठा एजेंडे की राजनीति करती रही तो फिर मुंबई आर्थिक राजधानी कब तक बनी रह सकेगी?