साध्वी प्रज्ञा को इस वजह से कभी बीजेपी से नही निकालेंगे मोदी और शाह

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साध्वी प्रज्ञा बीजेपी की नयी नवेली नेता है. वो राजनीति के गुर नही जानती है और न ही साध्वी की कोई विकासवादी छवि भी है जिस आधार पर उन्हें बीजेपी ने सांसद बनाया है या फिर संसद तक पहुंचाया है बल्कि इसके पीछे कारण है. अब ये बात तो आप भी जानते है कि साध्वी प्रज्ञा द्वारा लगातार विवादित बयान चाहे वो गांधी के बारे में हो, हेमंत करकरे के बारे में हो या फिर कुछ हो उस वजह से बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस को बोलने का मौका मिल जाता है. ऐसे में भाजपा बहुत सख्त पार्टी है और उस नेता को निलंबित कर देती है लेकिन साध्वी के साथ ऐसा न होने के पीछे कारण है.

हिन्दू आतकवाद थ्योरी का जवाब है साध्वी, दिग्विजय जैसे बड़े नेता को भी किया है परास्त
साध्वी प्रज्ञा और कई लोगो को निशाना बनाकर के कांग्रेस ने हिन्दू आतकवाद की थ्योरी दी थी और इस आधार पर भाजपा और संघ को काफी बदनामी झेलनी भी पड़ी थी क्योंकि सरकार उनकी थी तो वो कुछ कर भी नही सकते थे लेकिन अब न सिर्फ साध्वी को अधिकतर आरोपों से बरी कर दिया गया बल्कि भाजपा ने उसे सांसद बनाकर के उसी दिग्विजय सिंह को साध्वी के जरिये हराया जो हिन्दू आतक थ्योरी के जनक भी कहे जा सकते है.

अब साध्वी का संसद में होना और एक संवैधानिक पद पर होना अपने आप में भाजपा का कांग्रेस की उस थ्योरी को जवाब है जिसके जरिये उन्होंने संघ और बीजेपी को आज से लगभग दस वर्ष पहले बदनाम करने की कोशिश की थी. इस वजह से चाहे गोडसे को देशभक्त बताना हो या अपने कार्यकर्ताओं से ‘हम यहाँ सफाई करने नही आये है’ टाइप के बयान देना हो, उन सभी को भाजपा पचा लेती है.

अगर आप बाकी जगहों पर उदाहरण देखे तो वो चाहे कैलाश विजयवर्गीय के बेटे ही क्यों न हो? उन्हें निलंबित कर देने की वार्निंग दी गयी और स्पष्टीकरण माँगा गया जब उन्होंने बल्ला चलाया वही दूसरी तरफ साध्वी के लिए बीजेपी हाई कमान डिफेंसिव मोड में रहता है क्योंकि इससे कांग्रेस को बड़ी तेज जलन हो रही है.