भाजपा और भाजपा के समर्थको के लिये बड़ी बुरी खबर आयी है

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सन 2013 में बीजेपी के विजय रथ की शुरुआत हुई थी जब भाजपा ने राजस्थान के चुनाव जीते और इसके बाद में तो बीजेपी डो बार केंद्र के चुनाव, यूपी जैसे बड़े सूबे और दक्षिण में भी कई राज्य जीत चुकी है. इसके पीछे कही न कही भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का हाथ बताया जाता है जिन्होंने गोवा जैसे राज्य में भी भाजपा की सरकार खड़ी कर दी मगर एक ही चार्म हमेशा बना नही रहता और ये बात पिछले एक साल में नजर भी आने लगी है और बीजेपी के लिए चिंता भी कड़ी कर रही है.

एक साल में बीजेपी ने गवाये 4 राज्य, गैर भाजपाई खेमा हो रहा मजबूत
भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को कही न कही लगाम लगने लगी है और ये अपने आप में चिंता का विषय है क्योंकि केंद्र में तो बीजेपी अधिक मेजोरिटी के साथ लौट आयी है लेकिन राज्यों की सत्ता भाजपा के हाथ से फिसलती जा रही है जो अच्छा संकेत नही है. पहले राजस्थान फिर मध्यप्रदेश, उसके बाद छत्तीसगढ़ और इसके बाद अब महाराष्ट्र जैसा बड़ा और ख़ास राज्य भी भाजपा के हाथ से निकल गया.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सन 2017 तक बीजेपी देश के 71 प्रतिशत हिस्से पर राज्य कर रही थी जिसमे देश के बड़े बड़े राज्य थे लेकिन अब बीजेपी का हिस्सा महज 40 प्रतिशत रह गया है और राज्यो में गैर भाजपाई दलों की हिस्सेदारी कुल 60 प्रतिशत तक आ गयी है और ये कही न कही विपक्षी दलों के एकजुट होने का परिणाम है और शाह अभी भी इनका तोड़ निकालने में ही लगे हुए है. हालांकि पार्टी को अभी भी उनसे एक बड़े बाउंस बैक की उम्मीद है.

अब भाजपा को समझ भी नही आ रहा है कि अनुच्छेद 370, राम मंदिर और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर विजय हासिल करने के बाद भी अगर लोग वोट करने में पिछड़ रहे है तो उनकी गलती क्या है? क्या जातीय राजनीति या फिर बिकने वाले वोटो का दौर फिर से आ गया है?