कांग्रेस से गठबंधन पर नाराज हुए शिवसेना के नेता, इस्तीफ़ो का दौर शुरू

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पिछले कुछ दिनों से शिवसेना ने जो रूख अख्तियार किया है वो उन्हें सत्ता तो दिला देगा लेकिन लोगो के दिलो में जो सम्मान शिवसेना के लिये था वो धीरे धीरे जाने लग रहा है और ये बात उनके ही अपने नेताओं के रिएक्शन से पता चल रही है. शिवससैनिक शुरू से ही इस तरह के गठबंधन की खिलाफत कर रहे थे जिसमे कांग्रेस हो लेकिन इसके बावजूद ठाकरे ने सत्ता के लिये सोनिया गांधी से समझौता कर लिया और ये अपने आप में हैरान करने वाला भी था मगर अब इसके साइड इफ़ेक्ट आने भी शुरू हो गये है.

रमेश सोलंकी ने छोड़ी शिवसेना, कहा जो राम का नही वो मेरे किसी काम का नही
शिवसेना के कांग्रेस के साथ में गठबंधन करने के बाद से ही रमेश सोलंकी काफी नाराज थे. आपको बता दे रमेश सोलंकी शिवसेना की युवा इकाई को चलाते थे और उनके पीछे कम से कम दस हजार लोगो का डायरेक्ट समर्थन हर वक्त रहता था. उनका ठाकरे परिवार में आना जाना और आदित्य ठाकरे से मिलना भी लगा रहता था लेकिन उन्हें अब मजबूरी में ही सही लेकिन शिवसेना की युवा इकाई को छोड़ना पड़ रहा है.

रमेश सोलंकी महज 12 वर्ष की उम्र में ही बाला साहेब ठाकरे से प्रभावित हो गये थे और उनकी बातो को सुना करते थे. बड़े होते ही उन्होंने शिवसेना को ज्वाइन कर लिया और उसकी युवा इकाई को सँभालने लगे. रमेश सोलंकी का शिवसेना को बनाये रखने में बहुत अच्छा खासा हाथ माना जाता है क्योंकि वो जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेता थे. उन्होंने जाते हुए ट्विटर पर लिखा ‘मुझे कई लोग काफी दिन से मेरे पक्ष के बारे में पूछ रहे है तो बता दूं जो मेरे राम का नही वो मेरे किसी का का नही.’ ये कहकर के रमेश सोलंकी ने पार्टी छोड़ दी.

अब माना जा रहा है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है और ये दौर आगे तक जाएगा क्योंकि शिवसेना के कार्यकर्ता कभी भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओ के साथ में काम करना पसंद नही करेंगे क्योंकि वो उद्धव ठाकरे की वजह से नही बाल ठाकरे की वजह से इस पार्टी में जुड़े थे.