शिवसेना ने जेएनयू के छात्रो के बारे में जो कहा है, वो बाल ठाकरे जीवित होते तो बोलने नही देते

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शिवसेना इन दिनों बहुत ही बदली बदली सी नजर आ रही है इस बात में कोई भी शक नही है. भाजपा से नाता टूट चुका है, सदन से सत्ता पक्ष की कुर्सियां छीनी जा चुकी है, एनसीपी और कांग्रेस समर्थन देने के नाम पर सिर्फ नखरे दिखा रही है और इसे समय में शिवसेना को कही न कही अपने आपको सेक्युलरवादी सिद्ध तो करना ही था और ऐसी स्थिति में उन्होंने जेएनयू मामले पर वो कह दिया जिसे बाला साहब ठाकरे जीवित होते तो कभी सुन नही पाते क्योंकि ये उनकी राजनीति में किसी भी एंगल से नही था.

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने किया जेएनयू हड़ताल का समर्थन, लोकतंत्र में जायज है समर्थन
कुछ समय पहले कांग्रेस की प्रवक्ता रही प्रियंका ने हाल ही में कुछ समय पहले कांग्रेस छोड़कर के शिवसेना ज्वाइन की है. शिवसेना की इस नेत्री ने अपने बयान में कहा है कि जेएनयू के छात्र जो कर रहे है वो लोकतंत्र में पूरी तरह से जायज है जब तक वो शान्तिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने दिल्ली पुलिस पर भी उन पर गलत तरीके से लाठी चार्ज करने के आरोप लगाये.

बाल ठाकरे को बिलकुल पसंद नही थे टुकड़े टुकड़े वाले लोग
आज शिवसेना के नेता जिस तरह से जेएनयू के पक्ष में उतर आये है वैसा बाल ठाकरे के समय में बिलकुल भी नही था. वो मराठियों को प्रोत्साहित करते थे लेकिन कभी भी वो अव्यवस्था करने वाले या फिर देश पर सवाल खड़े करने वाले लोगो के पक्ष में नही रहे.

ये शिवसेना के लिये भी सोचने का समय है कि भगवा जलेगा जैसी बाते लिखने वाले और विवेकानंद की मूर्ति तोड़कर प्रदर्शन करने वाले लोगो को वो अपनी तरफ से समर्थन देना चाहते है या फिर नही? अब उद्धव ठाकरे या फिर संजय राउत की चुप्पी जिस तरह से प्रियंका चतुर्वेदी के बयान के बाद में बनी हुई है उससे तो यही साफ़ होता है कि वो मूक रूप से ही सही लेकिन उनके साथ में खड़े हो गये है.