एनडीटीवी चैनल देखने वालो के लिये बुरी खबर आयी है, रविश कुमार को लगा झटका

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अभी इन दिनों में जहाँ मीडिया समूह काफी लाभ अर्जित का रहे है और भारतीय मीडिया काफी दिन ब दिन प्रगति करता जा रहा है वही दूसरी तरफ एक मीडिया ग्रुप है जो घाटे ही घाटे में जा रहा है और इस कदर घाटे में जा रहा है कि उसके बंद होने जैसी बाते तक चलने लगी है. ये बात किसी बाहर वाले ने, किसी एजेंसी ने या फिर किसी अन्य मीडिया समूह ने नही बल्कि खुद एनडीटीवी की ऑडिटर टीम ने कही है. चलिए जानते है फिर कि आखिर ऐसा क्या हो गया है?

एनडीटीवी को पिछली तिमाही में भारी घाटा, चैनल की क्षमता पर उठाये गये है सवाल
दिन ब दिन एनडीटीवी की लोकप्रियता और इसकी टीआरपी गिरती जा रही है जिससे इसका बिजनेस भी कम हुआ है. आपको बता दे एनडीटीवी की कुल सम्पति 88 करोड़ रूपये के करीब है और अब एनडीटीवी पर इससे भी ज्यादा टीएफआई की रिपोर्ट के अनुसार का कर्ज हो चुका है. यही नही पिछली तिमाही में इस चैनल को 10 करोड़ के करीब घाटा भी हुआ है. अगर इसी तरह से ये घाटा चलता रहा तो ये चैनल कभी भी बंद होने की कगार पर पहुँच सकता है.

इसके प्रमुख पहले से ही कर रहे है मनी लांड्रिंग जैसे केसेज का सामना
एनडीटीवी के प्रमुख प्रणव रॉय तो पहले से ही कई केसेज का सामना कर हरे है जिसके चलते उनके साथ ही साथ उनके मीडिया समूह की साख भी गिर गयी है. इसके अलावा इस चैनल के सबसे बड़े चेहरे रवीश कुमार की जाति आधारित और एक पक्षीय पत्रकारिता के चलते भी चैनल की लोकप्रियता कई अंको से गिर गयी है और ऐसे में चैनल को मिलने वाले विज्ञापन कम हुए है और अब ये बंद होने के पहले की पोजीशन पर आकर के खड़ा हो गया है.

हालांकि अब इसके पीछे कई तर्क दिए जा रहे है कि ऑडिट के समय ये नही था, वो नही था लेकिन ऐसे समय में इस मीडिया समूह में काम करने वालो की नौकरी पर तो संकट आ ही गये है और उनके मन में प्रश्नचिन्ह हमेशा रहेगा कि पता नही कब इसके दफ्तर पर ताला लग जाए.