एनडीए से बाहर होने के बाद पहली बार छलका शिवसेना का दर्द, राउत ने दिया ऐसा बयान

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शिवसेना ने लगभग तीस वर्षो की दोस्ती को तोड़ते हुए महाराष्ट्र की सत्ता को चुना जहां पर उनके पास एनसीपी और कांग्रेस जैसी पार्टियों का समर्थन रहेगा. ये अपने आप में अचम्भे की बात भी है क्योंकि जिस कांग्रेस का विरोध करते हुए ही शिवसेना का जन्म हुआ था उसी के साथ में वो जा मिल. खैर अब इतना सब होने के बाद में भाजपा ने भी एक्शन लिया और शिवसेना को एनडीए से बाहर कर दिया. उन्हें अब किसी भी एनडीए की बैठक में न्यौता तक नही भेजा जा रहा है तो इसका मतलब हम भी समझ ही सकते है.

संजय राउत ने कहा, कैसे कोई तुगलक हमें बाहर कर देगा जब शिवसेना को बीजेपी ने एनडीए से अलग कर दिया तो संजय राउत ने मीडिया समूह से बात करते हुए कहा ‘हमे विपक्ष में बिठाने से क्या? हम तो सड़क पर बैठने को भी तैयार है. हमने सड़क की राजनीति की है, लेकिन एनडीए से निकालने वाली बात हास्यास्पद है. हम खुद ही एनडीए के फाउंडर थे. अब कौन है एनडीए का अध्यक्ष जिसके पास ये अधिकार है? कैसे कोई तुगलक हमे निकाल दे? अगर निकालना था तो घटक दलों की बैठक बुलाते. क्या नीतीश कुमार, प्रकाश सिंह बादल आदि से पूछा गया?’

शिवसेना ने खेला भावुकता वाला कार्ड अब क्योंकि शिवसेना एनडीए से बाहर हो गयी है तो उन्होंने भावुकता वाला कार्ड खेलना शुरू कर दिया है. राउत ने कहा कि एनडीए में ऐसी मनमानी अटल जी के टाइम बिलकुल भी नही थी. ये सब अब ही हुआ है. जिन लोगो से हमारा भावुकता वाला रिश्ता था वो तो चले गये. अब किसी ने एनडीए के अस्तित्व को बचाने की कोशिश तक नही की. कल को नीतीश कुमार को भी एनडीए से ऐसे ही निकाल दिया जाएगा.

अब संजय राउत जो कुछ भी कहे लेकिन सच तो यही है कि वो सत्ता से बेदखल हो चुके है और उनके पास में विपक्ष में बैठने के अलावा और कोई रास्ता वाकई में नही ही बचा है. हालांकि सेना ने कहा है कि वो इसके लिए तैयार है.