राम मंदिर मामले में सुन्नी वफ्फ बोर्ड के वकील का बयान, अब उठायेंगे ये कदम

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राम मंदिर का केस अब जाकर के बड़ी मुश्किल से बंद हुआ है और इतनी सदियों की मशक्कत के बाद में जाकर के राम लला को उनकी अपनी जमीन मिल सकी जिस पर उन्होंने जन्म लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया है कि सरकार मंदिर का निर्माण करवाये और मन्दिर बनवाने के लिए एक ट्रस्ट बनाने का भी आर्डर दिया गया है जो अपने आप में एक अच्छा आदेश माना गया. हर कोई इससे बेहद ही खुश भी नजर आया मगर लगता है कि ये ख़ुशी कोई ज्यादा समय तक कुछ लोग टिकने देना नही चाहते है.

सुन्नी वफ्फ़ बोर्ड के वकील ने कहा, मंदिर फैसले पर दायर करेंगे पुनर्विचार याचिका
जफ़रयाब जिलानी पिछले दो दशक से भी अधिक वक्त से बाबरी की तरफ से केस लड रहे थे और अब वो जाहिर तौर पर दिखाई दे रहा है कि हार गये है लेकिन वो हार मानने को तैयार नही है. जिलानी ने बयान जारी करते हुए कहा ‘पूरा फैसला पढने के बाद में हमें अभी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्टि है. मैं तो यही कह रहा हूँ कि अब हमें पुनर्विचार याचिका लगानी होगी और कोर्ट को जो गलतियाँ हुई है वो बतानी होगी.’

कोर्ट का पुनर्विचार याचिका एक्सेप्ट करना भी है मुश्किल
जफ़रयाब जिलानी जो कह रहे है वो उनके हिसाब से सही है लेकिन कोर्ट के हिसाब से प्रेक्टिकल नही है क्योंकि राम मंदिर को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चक्कर निकालते हुए तीन दशक के करीब हो गये है. इसके बाद में सबसे उपरी बेंच और चीफ जज ने इस मामले में फैसला सुनाया है. ऐसे में अगर कोई सवाल खड़े करता भी है तो वो बिलकुल कही न कही बेमानी ही नजर आते है.

खैर अब ये तो जिलानी और सुन्नी वफ्फ़ बोर्ड पर है कि वो पुनर्विचार याचिका दायर करते है या फिर नही क्योंकि सरकार तो अपने कार्य पर लग गयी है. रिपोर्ट के मुताबिक़ इस माह के अंत तक ट्रस्ट के सदस्यों के नाम सामने आ जायेंगे जो मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले है.