अयोध्या केस हारने के बाद इकबाल अंसारी ने चली ये नयी चाल, उठायी एक और मांग

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अयोध्या में हाल ही में जो फैसला आया है उससे सभी लोग खुश है क्योंकि उस जमीन पर कई युगों से सिर्फ मंदिर था और इस कारण से सुप्रीम कोर्ट ने भे फैसला मंदिर के हक़ में ही दिया है. अब क्योंकि ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है तो उस पर कोई ऊँगली उठा नही सकता है और न ही इससे ऊपर कही और अपील डाली जा सकती है तो ऐसी स्थिति में हार का स्वाद चख रहे पक्षकार अपनी तरफ से अगली चाले चलने में मशगूल हो गये है ताकि विजेता पक्ष को थोड़ी परेशानी ही दे दी जाये.

इकबाल अंसारी ने कहा, हमे 67 एकड़ जमीन में से 5 एकड़ जमीन मिले जो सरकार ने पहले अधिग्रहित की थी
आपको याद हो तो नब्बे के दशक में ही सरकार ने राम मंदिर के आस पास की 67 एकड़ की जमीन अधिग्रहित कर ली थी और जाहिर तौर पर इस पर आगे आने वाले समय में मंदिर के आस पास का इलाका या ऐसा ही कुछ बनाने का प्लान अन्दर ही अन्दर रहा होगा मगर अब इकबाल अंसारी राम मंदिर की मूल जमीन का हिस्सा हार गये है तो कोर्ट के आदेश का अपनी सहूलियत के अनुसार गाल्ट इस्तेमाल करने में लग गये है.

आपको मालूम तो होगा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देने की बात कही है और इकबाल अंसारी ने कहा है कि सरकार को अगर हमें जमीन देनी है तो उस 67 एकड़ में से ही दे जो अधिग्रहित की गयी थी वरना हमे कुछ भी न दे. हम लेंगे तो वो ही लेंगे. इक़बाल अंसारी की ऐसी जिद के पीछे की वजह ये भी हो सकती है कि जन्मभूमि वाली जगह पर मस्जिद नही बना सके लेकिन वो उसके आस पास या जोड़ में या सामने मस्जिद बनाकर अपने अहंकार को संतुष्ट करना चाह रहे है.

बड़ी बात ये भी है कि दोनों ही धर्म के स्थलों का एक जगह होना आपस में सद्भाव की जगह झगडे भी पैदा कर सकता है क्योंकि अजान की आवाज और घंटियों की आवाजो से लेकर कई चीजे है जो आपस में डिस्टर्ब करने वाली होती है. अब इक़बाल अंसारी इस जगह पर शान्ति चाह ही नही रहे है उनकी मांग से तो ऐसा ही नजर आता है.