महाराष्ट्र में राज्यपाल का बड़ा फैसला, शिवसेना के सपने चूर चूर

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फ़िलहाल शिवसेना जो महाराष्ट्र की राजनीति में कर रही है वो किसी से भी छुपा हुआ तो बिलकुल भी नही है और ये अपने आप में चिंताजनक भी है क्योंकि दोनों ही गठबंधन की पार्टियाँ तो अलग हुई जिसमे शिवसेना और बीजेपी है लेकिन अब इतने दिन बीतने के बाद भी शिवसेना या कोई भी अन्य पार्टी राज्यपाल से मिलकर के सरकार बनाने के लिए अपनी बहुमत जुटा पाने सक्षम नही दिखाई दी है. ऐसे में राज्यपाल के पास में एक ही फैसला बचता है और रिपोर्ट्स के मुताबिक़ जिसकी उम्मीद की जा रही थी वो उन्होंने कर दिया है.

डीडी न्यूज के अनुसार राज्यपाल ने भेजी राष्ट्रपति शासन की सिफारिश, मोदी ने आपातकालीन केबिनेट की बैठक बुलायी
अब जब सबसे बड़ी पार्टी यानी बीजेपी बहुमत साबित नही कर पायी है और इसके बाद में शिवसेना और एनसीपी भी बहुमत दिखा पाने में अक्षम नजर आयी तो राज्यपाल ने गृहमंत्रालय को एक रिपोर्ट भेज दी है जिसमे उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है. मोदी सरकार ने इस आपातकालीन बैठक बुलाई है जिसमे इसके अप्रूवल की बात हो रही है और जाहिर तौर पर शिवसेना की ऐसी हरकतों के बाद में मोदी सरकार इसे अप्रूवल देने में जरा भी देरी नही करेगी.

राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जायेगी शिवसेना
राज्यपाल के इस फैसले के सामने शिवसेना ने भी तय कर लिया है कि वो नही झुकेगी. शिवसेना ने इसी के चलते हुए कपिल सिब्बल से भी संपर्क किया है ऐसा मीडिया सूत्रों में दावा है और वो राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाली है क्योंकि उन्हें बहुमत जुटाने के लिए पर्याप्त समय नही दिया जा रहा है.

हालांकि ये शासन परमानेंट नही होता है. जैसे ही कोई पार्टी या फिर कोई गठबंधन अपना बहुमत होने का दावा करता है तो फिर एक कानूनी प्रक्रिया पूरी करके दुबारा सरकार बनाई जा सकती है लेकिन अब शिवसेना इस पूरे कानूनी पछडे में न पड़कर के सीधे सीधे सकरार बनाना चाह रही है.