बीजेपी ने सरकार बनाने से किया इंकार, एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन देने के बदले रखी ऐसी शर्त

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महाराष्ट्र में सरकार नही बन पायी है क्योंकि किसी भी पार्टी को अभी तक स्पष्ट बहुमत नही मिल सका और ये अपने आप में चिंता की बात भी है क्योंकि जिस तरह से शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर के चुनाव लड़ा था मगर चुनावी परिणाम आने के बाद में शिवसेना की मांगे बीजेपी को नागवार गुजरी जिसके चलते दोनों के रास्ते अलग हो गये और अब आज ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पाटिल ने घोषणा की है कि उनके पास में बहुमत नही है जिसके चलते वो महाराष्ट्र में सरकार नही बनायेंगे. अब गेंद शिवसेना के पाले में आ गयी है.

समर्थन के लिये एनसीपी की शर्त, तोड़ने होंगे बीजेपी से सारे रिश्ते नाते
शिवसेना को कांग्रेस कही न कही समर्थन देने के लिये तैयार हो रही है और उनकी तरफ से पोजेटिव रिस्पोंस भी आया है मगर एनसीपी इस मामले में थोड़े तल्ख़ तेवर दिखा रही है. हाल ही में एनसीपी के ही सीनियर नेता ने बयान जारी करते हुए कहा ‘अगर शिवसेना हमारा समर्थन चाहती है तो उसे एनडीए से रिश्ता तोडना होगा. भाजपा से सारे रिश्ते नाते खत्म करने होंगे और केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जो भी शिवसेना के मंत्री है उनसे भी इस्तीफे दिलवाने पड़ेंगे.’

शिवसेना के लिये तलवार की धार पर चलने के बराबर होगा ये फैसला
शिवसेना के लिये अब ये समय बहुत ही ज्यादा कठिनाइयो से भरा होने वाला है क्योंकि ना कहने पर तो वो उसी जगह पर रह जायेंगे लेकिन अगर हाँ कहते है तो भाजपा से जो उन्हें केंद्र से फायदे मिलते थे वो बंद हो जायेंगे, भाजपा का जो वोट शिवसेना के लोगो को मिल रहा था वो रूक जाएगा और एनसीपी, कांग्रेस तो शिवसेना के शुरू से ही दुश्मन रहे है तो कभी भी वो अपना समर्थन दुबारा खींच सकते है और उनकी सत्ता ढह जायेगी.

फ़िलहाल उद्धव ठाकरे पूरे मामले पर नजर बनाये हुए है और चर्चाओं का दौर जारी है. वही भाजपा तो अपना फैसला सुनाकर के साफ़ साफ़ तरीके से बैठ चुकी है. भाजपा का मानना है सरकार बनेगी तो उनके हिसाब से बनेगी वर्ना कोई और बना ले.