कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मना करने के बाद भी सोनिया गांधी ने लिया ये बड़ा फैसला

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एक लम्बे अरसे तक अपने बेटे यानी राहुल गांधी को अध्यक्ष पद सौंपने के बाद में जब राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सफल होते हुए नजर नही आये तो सोनिया गांधी ने एक बार फिर से पार्टी की कमान हाथ में ले ली है और सभी जानते है जब सोनिया गांधी हाथ में कमान लेती है तो वो फैसले भी अपने मनमुताबिक़ ही करती है जैसा उन्होंने हाल ही में अपने साथ के सभी सदस्यों की सलाह को दरकिनार करते हुए किया है. हालांकि इसका एक अच्छा पहलू भी है जिसे नकार नही सकते है.

युवा कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव को मंजूरी दी, सभी वरिष्ठ नेता खिलाफ थे
कांग्रेस के युवाओं का संगठन कहा जाने वाला युवा कांग्रेस जिसमे कुछ समय पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी उसे सोनिया गांधी ने फिर से बहाल कर दिया है. कहा जा रहा है कि इसमें कांग्रेस के बड़े बड़े और वरिष्ठ नेता भी है जिन्होंने सोनिया गांधी के इस फैसले का विरोध जताया और उनका मानना था कि इस समय ऐसे फैसले लेना ठीक नही है लेकिन इसके बावजूद सोनिया गांधी ने ये फैसला लिया और अब पंजाब से इसकी शुरुआत भी हो गयी है.

राहुल की टीम के कई नेता नही चाहते थे कि सोनिया गांधी इस फैसले को करे मगर जब ऐसा हुआ है तो वो लोग खुलकर के इसकी खिलाफत भी कर रहे है. हालांकि इसका कोई खास असर सोनिया गांधी पर या फिर उनके फैसले पर होने वाला नही है. उन्होंने और भी कई बड़े फैसले लिए है जिससे बड़े बड़े नेताओं के कद छोटे हो गये है और कई लोग तो टीम राहुल के लोगो को पीछे धकेलने जैसी बाते भी कह रहे है जो कांग्रेस की अन्धरूनी कलह को सामने लाने जैसा है.

खैर जो भी है अभी तो मामला काफी ज्यादा गरम है जिसके चलते सोनिया गांधी बोलने से बच रही है मगर उनका मकसद सिर्फ दूसरी पार्टियों पर खुद पर अलोकतांत्रिक पार्टी होने के आरोप से बचाने का है.