शिवसेना का प्लान हुआ फेल, वापिस लौटकर बीजेपी के पास पहुंची

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शिवसेना महाराष्ट्र में चुनावों के परिणाम आने के बाद से ही लगातार भारतीय जनता पार्टी पर प्रेशर बना रही थी कि उसे सत्ता में हिस्सेदारी आधी मिले. महाराष्ट्र के केबिनेट में आधे शिवसेना के मंत्री बने और ढाई साल तक हमारी ही पार्टी का सीएम भी बने. इन सब मांगो को लेकर के शिवसेना भाजपा पर बिलकुल ही आक्रामक हो गयी थी और बीजेपी को लगातार बन रहे सत्ता समीकरणों का डर दिखाकर के अपनी मांगे मनवाना चाह रही थी. मगर कुछ भी काम कर नही पाया. चलिए आपको पिछले तीन दिन में हुई डेवलपमेंट को समझाते है.

एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन करके सरकार बनाने की धमकी दे रही थी शिवसेना,एनसीपी के किनारा करते ही प्लान फेल हो गया
शिवसेना के कई दिग्गज नेता जिनमे संजय राऊत का नाम बार बार आ रहा था वो कह रहे थे कि शिवसेना चाहे तो अभी समर्थन जुटाकर के सरकार बना सकती है मगर हम बीजेपी से गठबंधन का सम्मान करते है. इन सबके बीच शरद पंवार ने साफ़ कर दिया कि हम तो शिवसेना को समर्थन ही नही देंगे. इसी के साथ शिवसेना के सारे अरमान टूट गये और अब वो नरम रूख पर आ गयी है.

अब संजय राऊत ने दिखाई नरमी, गठबंधन धर्म का पालन करेंगे
अभी एक दिन पहले तक जो शिवसेना कह रही थी कि हम अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में है और बीजेपी से समझौता न करने की बाते हो रही थी वही शिवसेना अब कह रही है कि हम बीजेपी के साथ में गठबंधन धर्म को निभायेंगे. इसे कही न कही शिवसेना के रूख में नरमी के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि बीजेपी तो किसी भी हाल में मुख्यमंत्री पद शिवसेना को या आदित्य ठाकरे को देने के लिये तैयार नही है.

अब ऐसी स्थिति में शिवसेना की नरमी दिखा रही है कि वो भाजपा के पास में लौटकर के जाने वाली है जो लगभग होना तय ही था. ऐसे में लोग बीजेपी के कांफिडेंस की दाद दे रहे है जहाँ वो फडनवीस को मुख्यमंत्री पहले ही बता चुके है.