इस काम के लिये पहली बार मोदी और केजरीवाल एक हो गये है

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आम तौर पर जब कभी भी हम देखते है तो सभी पक्ष और विपक्ष की पार्टियाँ एक दुसरे के पीछे एक दुसरे को काटने को ही दौड़ती है. हर बार हम लोग ये सब चीजे होते हुए देखते भी है कि जनता के फायदे के लिए जब कभी भी कुछ होता है तो एक पार्टी अगर सत्ता में हो तो वो करने की कोशिश करती है और जो विपक्षी होते है वो उसमे अड़ंगे डालते है ताकि  सत्ता वालो को कही क्रेडिट न मिल जाए मगर इस बार एक अलग ही किस्म की अनोखी मिसाल देखने को मिली है.

दिल्ली में बिना अधिकार के बसी कोलोनियाँ नियमित करने को बनेगा क़ानून, केजरीवाल ने भी किया सपोर्ट
दरअसल दिल्ली में कच्ची कोलोनियाँ है जिनके अभी तक न तो पट्टे है और न ही कोई रजिस्ट्री है और न ही इस सम्बन्ध में कोई भी क़ानून है जिसके चलते जो लोग वहाँ दशको से रह रहे है मगर वो उस जमीन के हकदार नही है और कभी भी उन्हें कोई भी वहाँ से हटा रहा है. ऐसे में केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से इस सम्बन्ध में कुछ करने की मांग की थी.

अब प्रकाश जावडेकर ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इस पर बिल पेश करेगी जिससे लोग जो दिल्ली में कच्ची बस्तियों में रहते है वो अपनी जमीन की रजिस्ट्री प्राप्त कर सकेंगे और अपने अधिकार पा सकेंगे. केंद्र की सरकार दिल्ली में रहने वाले गरीब लोगो के लिए केजरीवाल सरकार के साथ में पूरी तरह से को ओर्डीनेट करेगी. अरविन्द केजरीवाल ने भी केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि मोदी सरकार ऐसा काम करती है तो हम उसका दिल से स्वागत करते है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस कदम से जिसमे दिल्ली की राज्य सरकार और केंद्र की मोदी सरकार शामिल है के पूर्ण होने से कही न कही दिल्ली में रह रहे लाखो बेघर कहे जाने वाले लोगो को कानूनन अपनी जमीन नसीब होगी. अब सवाल ये भी है कि ये सब होने में इस देश में पूरे सत्तर साल लग गये जबकि झुग्गी और कच्ची बस्तियों की समस्या तो दिल्ली में दशको से चली आ रही है.