भारत से बाहर रहने वाले हिन्दुओ को परेशान होने की जरूरत नही, शाह करेंगे ये काम

51

जब भी हम बात करते है इसाई देशो की या मुस्लिम देशो की तो उनकी एक बहुत ही बड़ी तादात है और हर देश अपने धर्म को काफी ज्यादा बढ़ावा भी देता है. मगर जब बात आती है पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराने हिन्दू धर्म की तो अपनी विस्तारवादी सोच न होने के कारण ये सिर्फ एक देश यानी भारत तक ही सीमित है और इस कारण से ये भारत के पडोसी देशो में भी पूरी तरह से अल्पसंख्यक हो चुका है जो चिंता का विषय भी है. भारत सरकार इस पर काम करने जा रही है.

शाह ने कहा, सिटीजनशिप बिल लायेंगे और प्रताड़ित हिन्दू, जैन और बौद्धों की सहायता करेंगे
जाने मानी मीडिया समूह इंडिया टुडे को अपने एक इंटरव्यू के दौरान अमित शाह ने कहा ‘हम सिटिजनशिप बिल लायेंगे और इसे सख्ती से लागू भी करेंगे. भारत के पडोसी देश जैसे अफगानिस्तान, बंगलादेश और पाक में अल्पसंख्यक हिन्दुओ, जैनों आदि को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ये लोग शरणार्थी होते है जिनके पास कोई रास्ता नही है और वो मदद लेने आते है ये घुसपैठिये नही कहे जायेंगे.’

शाह कहते है ‘अमेरिका भी अब इलीगल इमिग्रेंट्स को रोक रहा है, मगर उसने लोगो को अपने अन्दर आने से नही रोका है. रही बात धार्मिक आधार पर लोगो को देश की नागरिकता देने या शरण देने की तो अमेरिका के आस पास के देशो में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना होती नही है, अगर होती तो वो लोग भी जरुर देते. भारत के पडोसी देशो में ऐसी स्थिति है इसलिए हमें ऐसा करना पड़ता है. आप ही बताये ऐसे में वो लोग क्या करे? मर जाए क्या वो लोग?’

शाह के मुख्य एजेंडे में है सिटिजनशिप बिल
रिपोर्ट्स की माने तो इस बार के शीतकालीन सत्र में ही सिटिजनशिप बिल आ सकता है जो देश में नागरिकता के मूल स्वरुप में एक बड़ा बदलाव ला देगा और कही न कही इससे इजारायल जो यहूदियों को स्टेटस देता है तो भारत हिन्दुओ को देगा हालांकि दोनों में जमीन आसमान का फर्क है लेकिन तल दोनों का एक सा नजर आता है.