कांग्रेस की हालत खराब, चाय पीने के भी पैसे नही

150

इतिहास में पहली बार कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी सत्ता से इतनी दूर हो गयी है. लगभग ये छठा वर्ष चल रहा है जब कांग्रेस केंद्र की सरकार में नही है. यही नही अपने अधिकतर राज्यों की सरकारे भी कांग्रेस गँवा चुकी है. अब कांग्रेस की सरकारे और सत्ता कम हुई है लेकिन खर्चे तो वैसे के वैसे है और नेताओं के रहने के तौर तरीके भी वैसे है. ऐसे में सत्ता से बेदखल पार्टी को फंड भी कम मिलता है चन्दा कम आता है तो खर्चे भी सीमित करने पड़ते है और अब इन दिनो कांग्रेस उसी को बैलेंस करने में लगी हुई है.

चाय नाश्ते के खर्चे सीमित करे, नेता बिना फ़ालतू होटल और हवाई खर्चे बंद करे
कांग्रेस पार्टी के नेताओं को नाश्ता और चाय आदि आल इंडिया कांग्रेस कमिटी की केन्टीन से मिलता है. अब तक ये सब अनलिमिटेड होता था लेकिन नए आदेश के अनुसार अब हर व्यक्ति को 3 हजार रूपये महीना का ही फायदा मिलेगा. उससे ज्यादा का कोई खायेगा या पिएगा तो उसका पैसा पार्टी नही देगी बल्कि खुदको ही देना होगा. सभी पदाधिकारियों को इस फैसले के बाद में थोडा सा बुरा तो जरुर लगा है लेकिन फंड की कमी के चलते ये सब करना पड़ रहा है.

ये सब तो कुछ भी नही है, कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं से ये भी कहा है कि अगर छोटे एक से दुसरे शहर की तरफ यात्रा करनी हो तो आप हवाई सफ़र की बजाय ट्रेन से यात्रा करे और अगर जरूरत न हो तो होटल बुक न करे और अपना काम करके दुबारा उस शहर से निकल ले. इससे पैसे की बचत होगी क्योंकि इन सबका पैसा भी कभी कांग्रेस पार्टी के फंड से ही मिला करता था मगर इसमें भी अब हाथ थोडा कठोर हो जाएगा.

पार्टी की सम्पति में गिरावट के चलते लिये जा रहे है फैसले
एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक से दो साल के अंदर कांग्रेस पार्टी की सम्पति 15 प्रतिशत तक गिर गयी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि नेताओ के शौक और खर्चे खूब है लेकिन न तो चंदा ठीक से मिल रहा है और न ही पार्टी सत्ता हासिल कर पा रही है.